आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही का इस्तीफा सिर्फ एक प्रशासनिक मामला नहीं, बल्कि सिस्टम की कार्यप्रणाली पर उठते सवालों का संकेत भी है। अब देखना होगा कि सरकार और राष्ट्रपति इस पर क्या फैसला लेते हैं।
रिंकू सिंह राही ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर अपने पद से हटने की अनुमति मांगी है। वह पिछले करीब आठ महीनों से बिना किसी तय जिम्मेदारी के अटैच पोस्टिंग में थे। उन्होंने साफ कहा कि बिना काम किए वेतन लेना उनकी नैतिकता के खिलाफ है। यही वजह है कि उन्होंने इस स्थिति से बाहर निकलने का रास्ता चुना। इसी के साथ राही ने यह भी बताया कि वह सिस्टम से भाग नहीं रहे, बल्कि ऐसी जिम्मेदारी चाहते हैं जहां वे सक्रिय रूप से काम कर सकें।
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रिंकू राही पहले भी सुर्खियों में रह चुके हैं, जब उन्होंने पीसीएस अधिकारी रहते हुए बड़े घोटाले का खुलासा किया था। इसी के बाद उन पर जानलेवा हमला हुआ और उन्हें गोली भी लगी थी। अब उनके इस फैसले को कई लोग सिस्टम की खामियों से जोड़कर देख रहे हैं। उनका कहना है कि ईमानदार अधिकारियों को अक्सर साइडलाइन कर दिया जाता है। वहीं राही ने यह भी संकेत दिया कि मौजूदा व्यवस्था में उनकी कार्यशैली फिट नहीं बैठ पा रही थी।
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बताया जा रहा है कि मामले में कांग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि एक ईमानदार अधिकारी को बार-बार परेशान किया जा रहा है। कांग्रेस ने राष्ट्रपति से अपील की है कि राही का इस्तीफा मंजूर न किया जाए और उन्हें उपयुक्त जिम्मेदारी दी जाए। साथ ही यह भी कहा गया कि व्यवस्था में कुछ वर्गों के अधिकारियों को ज्यादा संघर्ष करना पड़ रहा है।