सरकार की यह पहल सिर्फ मौजूदा संकट से निपटने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक लॉन्ग टर्म ऊर्जा रणनीति का हिस्सा है। PNG के विस्तार से जहां एलपीजी पर दबाव कम होगा, वहीं उपभोक्ताओं को भी ज्यादा स्थिर और सुविधाजनक विकल्प मिलेगा।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय का मानना है कि मौजूदा वैश्विक हालातों में ऊर्जा स्रोतों के अन्य विकल्प बेहद जरूरी हो गए है। एलपीजी पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए PNG को एक प्रभावी विकल्प के तौर पर आगे बढ़ाया जा रहा है। बता दें कि सरकार का फोकस है कि ज्यादा से ज्यादा घरों और व्यावसायिक इकाइयों तक पाइपलाइन गैस पहुंचाई जाए। इससे सिलेंडर पर निर्भरता कम होगी और सप्लाई चेन पर बोझ भी घटेगा।
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PNG विस्तार को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने राज्यों के साथ मिलकर नई नीति लागू की है। इस नीति के तहत जो राज्य PNG इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने में सहयोग करेंगे, उन्हें अतिरिक्त एलपीजी आवंटन का लाभ मिलेगा। खास बात यह है कि ऐसे राज्यों को कमर्शियल एलपीजी का 10 प्रतिशत अतिरिक्त कोटा दिया जा रहा है। इससे राज्यों की भागीदारी बढ़ेगी और गैस नेटवर्क का तेजी से विस्तार हो सकेगा।
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सरकारी आंकड़ों के अनुसार हाल ही में PNG कनेक्शन लेने की रफ्तार में काफी तेजी आई है। पिछले एक महीने में लाखों नए कनेक्शन जारी किए गए हैं, जिनमें बड़ी संख्या नए उपभोक्ताओं की है। साथ ही, नए रजिस्ट्रेशन की संख्या भी लगातार बढ़ रही है, जो यह दर्शाती है कि लोग अब पाइपलाइन गैस को अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं। यह बदलाव भविष्य में एलपीजी पर निर्भरता कम करने में मदद करेगा।