बसना पुलिस और एंटी नारकोटिक टास्क फोर्स की संयुक्त कार्रवाई में 9 क्विंटल से ज्यादा गांजा बरामद हुआ है, जिसकी कीमत 4 करोड़ रुपये से ज्यादा बताई जा रही है। फिलहाल इस मामले में ड्राइवर और क्लीनर को गिरफ्तार कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
ऑपरेशन निश्चय के तहत पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि ओडिशा से एक ट्रक के जरिए भारी मात्रा में गांजा लाया जा रहा है, जो पलसापाली बैरियर की ओर बढ़ रहा है। सूचना मिलते ही बसना पुलिस ने तत्काल रणनीति बनाकर बैरियर पर नाकाबंदी शुरू कर दी। जैसे ही संदिग्ध ट्रक मौके पर पहुंचा, पुलिस ने उसे रुकवाया और ड्राइवर, क्लीनर को हिरासत में लिया। इस दौरान टीम ने दोनों से पूछताछ की और वाहन के दस्तावेज मांगे, लेकिन जवाब संतोषजनक नहीं मिला। इससे पुलिस का शक और गहरा गया और ट्रक की सघन तलाशी ली।
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वाहन की शुरुआती जांच में पुलिस को केवल केले की खेप दिखाई दी, जिससे एक बार लगा कि सूचना गलत हो सकती है। लेकिन जब टीम ने ट्रक के अंदर जाकर खोजबीन की तो सच्चाई सामने आ गई। केले के पीछे बड़ी चालाकी से गांजे की बोरियां छिपाकर रखी गई थीं। पुलिस ने एक-एक कर कुल 29 बोरियों को नीचे उतारा, जिनमें गांजा भरा हुआ था। जब इसका वजन किया गया तो यह 9 क्विंटल से ज्यादा निकला। जब्त गांजे की कीमत करीब 4 करोड़ 56 लाख रुपये आंकी जा रही है। बता दें कि तस्करों ने पुलिस को भ्रमित करने के लिए यह तरीका अपनाया था, लेकिन उनकी चालाकी ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी।
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जांच के दौरान यह भी सामने आया कि ट्रक पर फर्जी नंबर प्लेट लगाई गई थी, ताकि पुलिस को गुमराह किया जा सके। ड्राइवर और क्लीनर दोनों ने मिलकर तस्करी की साजिश रची थी और पुलिस को चकमा देने की कोशिश कर रहे थे। हालांकि मुखबिर की सटीक सूचना और पुलिस की तत्परता के चलते दोनों को मौके पर ही पकड़ लिया गया। आरोपियों के खिलाफ नारकोटिक एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। थाना बसना में अपराध पंजीबद्ध कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है। दोनों आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर भेजने की प्रक्रिया जारी है। इसके साथ ही पुलिस पूरे नेटवर्क की भी जांच कर रही है।
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पुलिस ने बताया कि पिछले तीन महीनों में मादक पदार्थों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान 72 मामलों में कुल 5629 किलो से ज्यादा यानी 56 क्विंटल से अधिक गांजा जब्त किया गया है। इस कार्रवाई में अब तक 187 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें 52 छत्तीसगढ़ के और 135 अन्य राज्यों के हैं। पुलिस का कहना है कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और अवैध तस्करी करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।