इंदौर।नाम भले ही दीपक हो, लेकिन काम ऐसे कि पुलिस की वर्दी पर ही कलंक बनकर सामने आ जाए। पंढरीनाथ थाने की सीआई सेल में पदस्थ जवान दीपक परमार इन दिनों अपने व्यवहार को लेकर चर्चा में हैं। सिविल ड्रेस में ड्यूटी करते हुए उन्होंने जिस तरह मीडिया से बदसलूकी की और पत्रकार को थाने ले जाकर पीटने की धमकी दी, उसने पूरे पुलिस महकमे की छवि पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस की वर्दी कानून और व्यवस्था की प्रतीक मानी जाती है, लेकिन जब इसी वर्दी की आड़ में कुछ पुलिसकर्मी अपनी हदें पार कर देते हैं तो पूरा महकमा सवालों के घेरे में आ जाता है। ऐसा ही एक मामला सोमवार को सामने आया, जब सिविल ड्रेस में तैनात एक पुलिसकर्मी ने पत्रकारों से बदसलूकी करते हुए उन्हें खुलेआम थाने ले जाकर पीटने की धमकी दे डाली। हैरानी की बात यह रही कि जो पुलिसकर्मी खुद अपनी पहचान बताने से बचता रहा, वही मीडिया से बार-बार पहचान बताने की मांग करता नजर आया।
घटना इंदौर के बाणगंगा थाना क्षेत्र से जुड़ी है। यहां आशा कन्फेक्शनरी के संचालक दीपक दरियानी के बेटे संस्कार दरियानी द्वारा फैक्ट्री कर्मचारियों के साथ मारपीट किए जाने का मामला सामने आया था। आरोप है कि इस मामले में एक विधायक के फोन के बाद पुलिस ने संस्कार दरियानी के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय उल्टा फैक्ट्री कर्मचारियों पर ही प्रकरण दर्ज कर लिया। इससे नाराज कर्मचारी अपनी शिकायत लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे थे। कर्मचारियों के प्रदर्शन और संभावित भीड़ को देखते हुए पुलिस ने कलेक्टर कार्यालय के बाहर पहले से ही बैरिकेडिंग कर रखी थी। इसी दौरान मीडिया के कई प्रतिनिधि मामले की कवरेज के लिए मौके पर पहुंचे। आरोप है कि यहीं पर पंढरीनाथ थाने में पदस्थ सीआई सेल के जवान दीपक परमार ने पत्रकारों को अंदर जाने से रोक दिया।
सिर्फ रोकने तक बात सीमित रहती तो स्थिति सामान्य रहती, लेकिन जवान ने सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में मीडिया को “फर्जी” बताते हुए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया। इतना ही नहीं, उसने एक पत्रकार को धमकी देते हुए कहा कि “थाने ले जाऊंगा और वहां तुम्हें पीटूंगा।” घटना के दौरान मौजूद लोगों का कहना है कि जवान लगातार पत्रकारों से उनकी पहचान पूछता रहा, जबकि वह खुद सिविल ड्रेस में था और अपनी पहचान बताने से बचता रहा। इस व्यवहार से मौके पर मौजूद लोगों में भी नाराजगी देखने को मिली।
शिकायत के बाद भी सिर्फ औपचारिक खेद
घटना के बाद पत्रकारों ने पूरे मामले की शिकायत थाने में की। इस दौरान थाना प्रभारी सतीश पटेल ने केवल इतना कहा कि जवान की ओर से वे खेद व्यक्त करते हैं। हालांकि जिस पुलिसकर्मी ने खुलेआम धमकी दी, उसे थाने में बुलाकर पूछताछ करने या अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की कोई पहल नहीं की गई। मीडिया के प्रतिनिधि स्वयं थाने तक पहुंच गए, लेकिन वहां भी आरोपी जवान को सामने नहीं लाया गया। इससे पूरे मामले में पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
नाम दीपक लेकिन हैं कलंक -
बताया जा रहा है कि दीपक परमार पिछले लगभग दस वर्षों से पुलिस सेवा में है और छत्रीपुरा, पंढरीनाथ और सराफा जैसे थानों में पदस्थ रह चुका है। सूत्रों के मुताबिक पहले वह बीट ड्यूटी में तैनात था, लेकिन बाद में एक अन्य साथी की सिफारिश के चलते उसे सीआई सेल में लगा दिया गया। पुलिस महकमे के जानकारों का कहना है कि ऐसे कुछ कर्मचारी पूरे विभाग की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं। एक ओर पुलिस और मीडिया के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखने की कोशिशें होती हैं, वहीं दूसरी ओर इस तरह की घटनाएं उस विश्वास को कमजोर कर देती हैं।
वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा—मामला देखेंगे
पूरे मामले को लेकर जब डीसीपी जोन-4 आनंद कलादगी से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि फिलहाल मामला उनके संज्ञान में नहीं है। उन्होंने कहा कि वे इस संबंध में थाना प्रभारी से जानकारी लेकर उचित कार्रवाई करेंगे।
आनंद कलादगी, डीसीपी जोन-4- “मामला अभी मेरे संज्ञान में नहीं आया है। मैं टीआई से जानकारी लेकर पूरे घटनाक्रम की जांच करवाऊंगा।”