तेल अवीव। कूटनीति जब सिर्फ दस्तावेजों तक सीमित न रहकर भावनाओं, सम्मान और भरोसे से जुड़ जाती है, तब रिश्ते इतिहास रचते हैं। इजराइल की धरती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मौजूदा दौरा भी कुछ ऐसा ही संदेश देता है। एयरपोर्ट पर प्रोटोकॉल तोड़कर स्वागत, संसद में ऐतिहासिक संबोधन, सर्वोच्च सम्मान और रात को डिनर में भारतीय परिधान पहनकर किया गया आत्मीय स्वागत। इन सबने भारत-इजराइल संबंधों को एक नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है।
गुरुवार को पीएम मोदी की इजराइल यात्रा का दूसरा और अंतिम दिन है। यह दिन न सिर्फ भावनात्मक रूप से अहम है, बल्कि रणनीतिक साझेदारी, रक्षा सहयोग और भविष्य के आर्थिक समझौतों के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दूसरे दिन की शुरुआत प्रधानमंत्री मोदी येरुशलम स्थित याद वाशेम में श्रद्धांजलि अर्पित करने से करेंगे। यह स्मारक होलोकॉस्ट में मारे गए यहूदियों की याद में बनाया गया है। याद वाशेम सिर्फ एक संग्रहालय नहीं, बल्कि मानव इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक की गवाह है। पीएम मोदी का यहां जाना भावनात्मक और नैतिक दोनों दृष्टियों से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी इजराइल के राष्ट्रपति इसाक हरजोग से मुलाकात करेंगे। इस बैठक में द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय हालात और भविष्य की रणनीति पर चर्चा होने की उम्मीद है।
दोपहर से पहले प्रधानमंत्री मोदी और नेतन्याहू के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठक होगी। इस बैठक में कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
चर्चा के प्रमुख विषय
बैठक के बाद कुछ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर और संयुक्त प्रेस बयान जारी होने की संभावना है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत और इजराइल के बीच ड्रोन की खरीद और जॉइंट मैन्युफैक्चरिंग को लेकर बातचीत हो सकती है। भारत Heron MK-2 MALE ड्रोन खरीदने की योजना पर विचार कर रहा है।
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फीचर |
विवरण |
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उड़ान समय |
45 घंटे |
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अधिकतम ऊंचाई |
35,000 फीट |
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पेलोड क्षमता |
470 किलोग्राम |
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उपयोग |
निगरानी, स्ट्राइक, इंटेलिजेंस |
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खासियत |
हर मौसम में ऑपरेशन |
यह ड्रोन भारत की निगरानी और सुरक्षा क्षमताओं को काफी मजबूत कर सकता है।
इजराइल अपने एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम Iron Dome की तकनीक भारत के साथ साझा करने पर भी विचार कर सकता है। यह सिस्टम रॉकेट और छोटी दूरी की मिसाइलों को हवा में ही नष्ट करने में सक्षम है।
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रडार सिस्टम सबसे पहले आसमान में मौजूद खतरे की पहचान करता है। जैसे ही कोई दुश्मन मिसाइल या रॉकेट लॉन्च होता है, रडार उसकी दिशा, गति और ऊंचाई को ट्रैक कर लेता है। इसके बाद सिस्टम यह तय करता है कि, वह मिसाइल किसी आबादी वाले इलाके, सैन्य ठिकाने या महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर जा रही है या नहीं। अगर आकलन में यह सामने आता है कि मिसाइल से जान-माल को खतरा हो सकता है, तो तुरंत इंटरसेप्टर मिसाइल दागने का फैसला लिया जाता है। यह इंटरसेप्टर हवा में ही दुश्मन की मिसाइल को नष्ट कर देता है। इस पूरी प्रक्रिया में आधुनिक तकनीक और ऑटोमैटिक सिस्टम की अहम भूमिका होती है, जिसकी वजह से इसकी सफलता दर 90 प्रतिशत से भी ज्यादा मानी जाती है।
भारत और इजराइल के बीच व्यापारिक रिश्ते भी लगातार मजबूत हो रहे हैं। दोनों देशों के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लेकर बातचीत जारी है।
भारत-इजराइल व्यापार आंकड़े
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विवरण |
राशि |
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कुल व्यापार |
₹31,494 करोड़ |
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भारत से निर्यात |
₹18,618 करोड़ |
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इजराइल से आयात |
₹13,659 करोड़ |
FTA से खासतौर पर छोटे और मध्यम उद्योगों को फायदा मिलने की उम्मीद है।
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समय |
कार्यक्रम |
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सुबह 9:00 |
याद वाशेम में श्रद्धांजलि |
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सुबह 10:30 |
राष्ट्रपति से मुलाकात |
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11:30-12:30 |
नेतन्याहू के साथ बैठक |
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12:45 |
समझौतों पर हस्ताक्षर |
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1:15 |
भारत वापसी |
प्रधानमंत्री मोदी बुधवार को दो दिन के दौरे पर इजराइल पहुंचे। तेल अवीव एयरपोर्ट पर इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अपनी पत्नी के साथ पीएम मोदी को रिसीव करने पहुंचे। यह दृश्य अपने आप में असाधारण था, क्योंकि आम तौर पर ऐसा स्वागत बहुत कम देखने को मिलता है।
इसके बाद पीएम मोदी का भव्य स्वागत हुआ। प्रवासी भारतीयों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए भारत-इजराइल की दोस्ती का रंग दिखाया। यह दौरा इसलिए भी खास है क्योंकि पीएम मोदी इजराइल का दौरा करने वाले अब तक एकमात्र भारतीय प्रधानमंत्री हैं।
दौरे के पहले दिन की सबसे बड़ी उपलब्धि रही इजराइली संसद नेसेट में प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन। वे नेसेट को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने। इस मौके पर उन्हें संसद का सर्वोच्च सम्मान ‘स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल’ प्रदान किया गया।
अपने भाषण में पीएम मोदी ने भारत और इजराइल के रिश्तों को केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि सभ्यतागत बताया। उन्होंने कहा कि, दोनों देशों के संबंध हजारों साल पुराने हैं और आज भी साझा मूल्यों पर टिके हुए हैं।

140 करोड़ भारतीयों का संदेश - मित्रता, सम्मान और मजबूत साझेदारी
यहूदी समुदाय की सुरक्षा - भारत में यहूदी समुदाय ने हमेशा सुरक्षित जीवन जिया
2000 साल पुराने रिश्ते - धार्मिक और व्यापारिक संपर्कों का उल्लेख
आतंकवाद पर सख्त रुख - निर्दोष नागरिकों की हत्या किसी भी हाल में गलत
गाजा शांति पहल - UNSC समर्थित समाधान का समर्थन
नेतन्याहू ने भी अपने संबोधन में भारत और भारतीय सभ्यता की खुले दिल से सराहना की।
पहले दिन का एक दृश्य सोशल मीडिया और कूटनीतिक हलकों में खासा चर्चा में रहा। रात्रिभोज के दौरान प्रधानमंत्री नेतन्याहू पारंपरिक भारतीय परिधान में पीएम मोदी का स्वागत करते नजर आए। यह देखकर पीएम मोदी भी प्रसन्न हुए और उन्होंने इसकी सराहना की।
नेतन्याहू ने इस पल का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए हिंदी में लिखा कि, उन्होंने अपने मित्र प्रधानमंत्री मोदी को भारतीय परिधान पहनकर चौंकाया। यह कदम दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक रिश्तों की गहराई को दर्शाता है।
इस दौरे की टाइमिंग को लेकर संसद की विदेश मामलों की स्थायी समिति में सवाल भी उठे हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच यात्रा को लेकर चिंता जताई गई। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि, सभी प्रधानमंत्री स्तर की यात्राएं सुरक्षा आकलन के बाद ही तय की जाती हैं।
1950 में भारत ने इजराइल को आधिकारिक रूप से मान्यता दी थी, लेकिन उस समय वैश्विक और क्षेत्रीय परिस्थितियों के कारण दोनों देशों के रिश्ते सीमित दायरे में रहे। इसके पीछे भारत की ऐतिहासिक और नैतिक सोच थी, जिसमें फिलिस्तीन के प्रति समर्थन एक अहम नीति का हिस्सा रहा। भारत लंबे समय तक फिलिस्तीन के आत्मनिर्णय के अधिकार और स्वतंत्र राष्ट्र की मांग का समर्थक रहा, जिसे उसकी विदेश नीति का नैतिक आधार माना जाता था।
वर्ष 1992 में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला, जब भारत और इजराइल के बीच औपचारिक कूटनीतिक संबंध स्थापित हुए। इसके बाद दोनों देशों के बीच रक्षा, कृषि, विज्ञान और तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग धीरे-धीरे बढ़ने लगा। हालांकि, भारत ने इस दौरान भी फिलिस्तीन समर्थक रुख को पूरी तरह नहीं छोड़ा और संतुलन बनाए रखा।
2017 में यह रिश्ता एक नए दौर में प्रवेश कर गया, जब भारत के प्रधानमंत्री की इजराइल की ऐतिहासिक यात्रा हुई। यह पहली बार था जब किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने इजराइल का आधिकारिक दौरा किया। इस यात्रा ने यह साफ कर दिया कि भारत अब अपनी विदेश नीति में व्यावहारिक और रणनीतिक सोच को प्राथमिकता दे रहा है। रक्षा सौदों, सुरक्षा सहयोग और तकनीकी साझेदारी में दोनों देशों के रिश्ते और मजबूत हुए।
आज भारत की नीति को फिलिस्तीन-समर्थन बनाम इजराइल-समर्थन के पुराने खांचे में नहीं देखा जाता। भारत अब एक संतुलित और बहुआयामी दृष्टिकोण अपना रहा है, जिसमें वह इजराइल के साथ रणनीतिक साझेदारी निभाते हुए फिलिस्तीन के अधिकारों का समर्थन भी करता है। यह बदलाव भारत की स्वतंत्र विदेश नीति, बदलती वैश्विक भूमिका और अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देने की सोच को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
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