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125 साल बाद लौटी बुद्ध की धरोहर :पिपरहवा अवशेषों की भारत वापसी, पीएम मोदी ने किया प्रदर्शनी का उद्घाटन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भगवान बुद्ध से जुड़े पिपरहवा अवशेषों की भारत वापसी को ऐतिहासिक बताया। 125 साल बाद लौटी यह धरोहर गुलामी के दौर में देश से बाहर ले जाई गई थी। दिल्ली में लगी प्रदर्शनी में इन पवित्र अवशेषों को देखा जा सकता है, जो भारत की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक हैं।
पिपरहवा अवशेषों की भारत वापसी, पीएम मोदी ने किया प्रदर्शनी का उद्घाटन
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भगवान बुद्ध से जुड़े पिपरहवा अवशेषों की भारत वापसी पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि इन पवित्र अवशेषों को अपने बीच पाकर देश धन्य हो गया है। करीब 125 साल बाद भारत की अमूल्य विरासत वापस लौटी है, जो हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है।

    गुलामी के दौर में छीने गए थे अवशेष

    पीएम मोदी ने कहा कि गुलामी के काल में ये अवशेष भारत से बाहर ले जाए गए थे। जिन लोगों ने इन्हें ले जाया, उनके लिए ये केवल प्राचीन वस्तुएं (एंटीक) थीं। इसी वजह से इन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार में नीलाम करने की कोशिश भी की गई।

    नीलामी रोकने का भारत का संकल्प

    प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने तय किया था कि इन पवित्र अवशेषों की नीलामी नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने गोदरेज समूह का आभार जताया, जिनके सहयोग से यह संभव हो सका कि ये अवशेष भगवान बुद्ध की भूमि पर वापस आ सके।

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    पिपरहवा अवशेषों की खोज का इतिहास

    साल 1898 में उत्तर प्रदेश के पिपरहवा, जो कपिलवस्तु क्षेत्र में स्थित है, वहां खुदाई के दौरान भगवान बुद्ध से जुड़े ये अवशेष मिले थे। यह खुदाई ब्रिटिश शासन के समय हुई थी। खुदाई कराने वाले डब्ल्यू. सी. पेपे उस समय ब्रिटिश सरकार में इंजीनियर थे। बाद में इन अवशेषों को भारत से बाहर भेज दिया गया।

    दिल्ली में लगाई गई विशेष प्रदर्शनी

    अब ये पवित्र अवशेष वापस भारत आ चुके हैं। इन्हें दिल्ली के राय पिथौरा सांस्कृतिक परिसर में आयोजित विशेष प्रदर्शनी में रखा गया है। इस प्रदर्शनी का उद्घाटन स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया।

    क्या हैं पिपरहवा अवशेष?

    पिपरहवा अवशेष भगवान बुद्ध से जुड़ी पवित्र और ऐतिहासिक वस्तुएं हैं। ये उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले के पिपरहवा क्षेत्र में खुदाई के दौरान मिले थे। मान्यता है कि इनमें भगवान बुद्ध की अस्थियां (धातु अवशेष) और उनसे जुड़ी प्राचीन वस्तुएं शामिल हैं, जिन्हें उनके महापरिनिर्वाण के बाद अलग-अलग स्थानों पर सुरक्षित रखा गया था।

    Shivani Gupta
    By Shivani Gupta

    शिवानी गुप्ता | MCU, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ग्रेजुएशन | 9 वर्षों की टीवी और डिजिटल तक की य...

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