धर्म डेस्क। पितरों का आशीर्वाद जहां जीवन की सभी बाधाओं को दूर करता है। वहीं पितृदोष के कारण कई दिक्कतें हमारे जीवन में प्रवेश करती हैं। पितृदोष तब होता है जब हमारे पूर्वज या पितृ हमसे रूठ जाते हैं। हिंदू धर्म में पितृ देवताओं के रूप में माने जाते हैं और उनका आशीर्वाद जीवन में सुख, शांति और सफलता लाता है। जब पितृदोष होता है तो जीवन में अड़चनें, असफलता और बाधाएं दिखाई देने लगती हैं।
पितृदोष के कारण
पितृदोष लगने के कई कारण होते हैं जैसे- ज्योतिषीय दृष्टि से कुंडली में राहु और सूर्य की विशेष स्थितियां, पितरों का सही अंतिम संस्कार न करना, पूर्वजों का सम्मान न करना, पेड़ काटना या सांप मारना आदि।
पितृदोष के लक्षण
यदि आप पर पितृदोष का प्रभाव है तो यह संकेत मिल सकते हैं
- घर में सुख-शांति का न रहना।
- परिवार में लगातार वाद-विवाद होना।
- संतान प्राप्ति में बाधाएं या संतान की स्वास्थ्य समस्याएं।
- करियर में सफलता न मिलना।
- सपनों में पितरों का बार-बार दिखना।
- घर में पीपल के पेड़ का अचानक उगना।
- मेहनत का उचित फल न मिलना।
पितृदोष का निवारण
पितृदोष से मुक्ति पाने के लिए कुछ आसान उपाय हैं-
- पितृपक्ष में श्राद्ध और तर्पण करें- पूर्वजों को सम्मान दें और उनके लिए जल व भोजन का दान करें।
- पूर्णिमा और अमावस्या पर दान दें- दान करने से पितृ प्रसन्न होते हैं।
- पशु-पक्षियों को भोजन दे- चींटी, कुत्ता, मछली और गाय को अन्न व जल दें।
- पेड़ लगाएं और उनकी देखभाल करें- नीम, पीपल और बरगद के पेड़ लगाकर पानी दें।
- दीपक जलाएं- शनिवार और अमावस्या के दिन पीपल के नीचे दीपक जलाने से पितृ प्रसन्न होते हैं।