पेट्रोल पर विंडफॉल टैक्स खत्म, डीजल और ATF पर भी राहत; जानें नई एक्सपोर्ट ड्यूटी

केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल और हवाई ईंधन यानी ATF के एक्सपोर्ट पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में कटौती की है। नई दरें 14 अगस्त से लागू हो गई हैं। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक, पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर लगने वाला टैक्स पूरी तरह खत्म कर दिया गया है, जबकि डीजल और ATF पर भी शुल्क कम किया गया है। इस फैसले के बाद पेट्रोल एक्सपोर्ट पर अब कोई विंडफॉल टैक्स नहीं लगेगा। वहीं डीजल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी घटाकर 24 रुपये प्रति लीटर और ATF पर 19.5 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है। हालांकि, इसका असर घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल-डीजल की मौजूदा कीमतों पर नहीं पड़ेगा।
पेट्रोल एक्सपोर्ट पर टैक्स हुआ जीरो
सरकार ने पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर लगने वाले 3.5 रुपए प्रति लीटर के विशेष शुल्क को पूरी तरह खत्म कर दिया है। यह टैक्स 3 अगस्त को लगाया गया था। अब नई व्यवस्था के तहत पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर विंडफॉल टैक्स की दर शून्य होगी। पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर टैक्स में यह सबसे बड़ी राहत है। इसका सीधा फायदा उन रिफाइनरी कंपनियों को मिलेगा जो पेट्रोल को विदेशी बाजारों में एक्सपोर्ट करती हैं।
डीजल पर 25.5 से घटकर 24 रुपए प्रति लीटर हुआ टैक्स
डीजल के एक्सपोर्ट पर लगने वाले विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क यानी SAED में भी कटौती की गई है। पहले डीजल एक्सपोर्ट पर 25.5 रुपए प्रति लीटर का शुल्क लिया जा रहा था। अब इसे घटाकर 24 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। यानी डीजल एक्सपोर्ट पर कंपनियों को 1.5 रुपये प्रति लीटर की राहत मिली है। यह बदलाव भी 14 अगस्त से लागू हो गया है।
ATF पर भी एक्सपोर्ट ड्यूटी में कटौती
हवाई जहाजों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी ATF के एक्सपोर्ट पर भी सरकार ने शुल्क कम किया है। पहले ATF पर 22 रुपए प्रति लीटर की एक्सपोर्ट ड्यूटी लग रही थी। अब इसे घटाकर 19.5 रुपए प्रति लीटर कर दिया गया है। इस तरह ATF के एक्सपोर्ट पर शुल्क में 2.5 रुपए प्रति लीटर की कटौती की गई है।
घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर क्या होगा असर?
सरकार के इस फैसले का घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल की मौजूदा कीमतों पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा। वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल और डीजल पर लागू मौजूदा ड्यूटी दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसका मतलब है कि पेट्रोल पंप पर ग्राहकों को मिलने वाले पेट्रोल और डीजल की कीमतें इस फैसले से सीधे तौर पर नहीं बदलेंगी। नई दरें मुख्य रूप से विदेशों में फ्यूल एक्सपोर्ट करने वाली रिफाइनरीज और कंपनियों पर लागू होंगी।
क्या होता है विंडफॉल टैक्स?
विंडफॉल टैक्स वह अतिरिक्त टैक्स है जो किसी कंपनी को सामान्य से बहुत ज्यादा मुनाफा होने पर लगाया जाता है। ईंधन के मामले में सरकार इसे उस समय लागू करती है, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से घरेलू रिफाइनरी कंपनियों को एक्सपोर्ट से असाधारण मुनाफा होने की स्थिति बनती है। दिए गए स्रोत के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई थी। इस दौरान भारतीय ऑयल रिफाइनिंग कंपनियों के लिए विदेशी बाजार में ईंधन बेचना ज्यादा फायदेमंद हो गया था। सरकार ने घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और कंपनियों के असाधारण मुनाफे को नियंत्रित करने के लिए एक्सपोर्ट पर यह अतिरिक्त शुल्क लगाया था।
पहले डीजल और ATF पर लगाया गया था टैक्स
सरकार ने पहली बार 27 मार्च को डीजल और ATF के एक्सपोर्ट पर विंडफॉल टैक्स लगाया था। इसके बाद 16 मई से पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर भी यह टैक्स लागू किया गया। समय के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और रिफाइनिंग मार्जिन में बदलाव के आधार पर सरकार इस टैक्स की दरों में लगातार बदलाव करती रही है।
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हर 14-15 दिन में होती है विंडफॉल टैक्स की समीक्षा
सरकार विंडफॉल टैक्स की दरों की नियमित समीक्षा करती है। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और रिफाइनिंग मार्जिन का आकलन किया जाता है। आमतौर पर हर 14 से 15 दिन में स्थिति की समीक्षा के बाद सरकार तय करती है कि टैक्स को पहले की दर पर रखा जाए, बढ़ाया जाए या कम किया जाए। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और रिफाइनिंग मार्जिन में नरमी आती है तो विंडफॉल टैक्स को घटाया जा सकता है। फिलहाल 14 अगस्त से लागू नई व्यवस्था के तहत पेट्रोल एक्सपोर्ट पर टैक्स शून्य कर दिया गया है। डीजल पर 24 रुपये और ATF पर 19.5 रुपये प्रति लीटर शुल्क लागू रहेगा। वहीं घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की मौजूदा ड्यूटी दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।













