India- Russia Deal: अब भारत में बनेगा यात्री विमान, भारतीय एविएशन कंपनी ने रूस के साथ की डील

मॉस्को। मंगलवार को मॉस्को में भारत- रूस के बीच (HAL) के सीएमडी डीके सुनील के मौजूदगी में एक एग्रीमेंट पर साइन किए गए। इसके तहत अब भारतीय सरकारी एविएशन कंपनी HAL रूस के साथ सुखोई सुपरजेट (एसजे-100) यात्री विमान बनाएगी। इस बात की जानकारी HAL ने एक आधिकारिक बयान जारी कर दी। कंपनी ने बताया कि इन विमानों का इस्तेमाल उड़ान स्कीम के तहत छोटी दूरी की कनेक्टिविटी के लिए किया जाएगा।
देश को 200 विमानों की आवश्यकता
एचएएल ने बताया कि इस समय देश को करीब 200 विमान की आवश्यकता है। साथ ही हिंद महासागर क्षेत्र के अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थलों (जैसे श्रीलंका, मालदीव इत्यादि) को इसमें जोड़ दें तो 350 अतिरिक्त विमानों की आवश्यकता होगी। हालाकिं, एचएएल ने इस बात की पुष्टी नहीं कि भारत में कितने विमान बनाए जाएंगे। और इसका उत्पदान कब से शुरू होगा।
250 सुखोई व 600 मिग-21 जेट स्वदेशी
एचएएल के अनुसार, कम दूरी की उड़ानों के लिए एसजे-100 विमान एक महत्वपूर्ण बदलाव लाने वाला साबित हो सकता है। एचएएल और यूएसी के बीच यह साझेदारी दोनों संस्थानों के आपसी भरोसे का परिणाम है। एचएएल ने इससे पहले भारतीय वायुसेना के लिए रूस से लाइसेंस प्राप्त कर देश में लगभग 250 सुखोई लड़ाकू विमान और 600 मिग-21 जेट बनाए हैं। हालांकि, सिविल विमानन क्षेत्र में रूस के साथ यह पहला समझौता है।
एसजे-100 विमान निर्माण करती है रूस
बता दें, कि दो इंजन वाले एसजे-100 विमान का निर्माण रूस की सरकारी कंपनी, पब्लिक जॉइंट स्टॉक कंपनी यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन (PJSC-UAC) करती है। रूस में लगभग 200 ऐसे विमान 16 व्यावसायिक एयरलाइनों द्वारा घरेलू उड़ानों के संचालन में उपयोग किए जा रहे हैं।
HAL का पहला एयरक्राफ्ट प्रोजेक्ट
एचएएल के लिए यह उसका पहला सिविल एयरक्राफ्ट प्रोजेक्ट है। फिलहाल, स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) तेजस के अलावा एचएएल लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (एलसीएच) प्रचंड, एडवांस लाइट हेलीकॉप्टर (एएलएच) ध्रुव और एचटीटी ट्रेनर एयरक्राफ्ट का निर्माण करती है। ये सभी सैन्य विमान हैं। हालांकि, एचएएल ने 1961 में एवरो (एवीआरओ एचएस-748) नामक यात्री विमान भी बनाया था, लेकिन यह परियोजना 1988 में बंद कर दी गई थी।
आत्मनिर्भर भारत की ओर बड़ा कदम
एचएएल का कहना है कि एसजे-100 विमान का निर्माण भारतीय विमानन उद्योग के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ने जा रहा है। यह परियोजना नागरिक उड्डयन क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके जरिए न केवल निजी क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि विमानन उद्योग में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अनेक अवसर भी उत्पन्न होंगे।












