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परिसीमन बिल पर लोकसभा में जोरदार हंगामा :आगा रुहुल्लाह के विवादित बयान पर भड़के अमित शाह, सदन में तीखी बहस

लोकसभा में परिसीमन बिल 2026 पर बहस के दौरान आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी के बयान से विवाद खड़ा हो गया। छोटे राज्यों की राजनीतिक ताकत घटने की आशंका जताने पर अमित शाह ने कड़ी आपत्ति जताई। सदन में तीखी बहस हुई और मुद्दे ने सियासी तूल पकड़ लिया।
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आगा रुहुल्लाह के विवादित बयान पर भड़के अमित शाह, सदन में तीखी बहस
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    परिसीमन बिल 2026 को लेकर लोकसभा में उस समय माहौल गरमा गया, जब जम्मू-कश्मीर से सांसद आगा रुहुल्लाह ने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस बिल से देश में राजनीतिक संतुलन बिगड़ सकता है और छोटे राज्यों की आवाज कमजोर पड़ सकती है। उनके बयान के दौरान गृह मंत्री अमित शाह भी अपनी सीट से खड़े हो गए और उन्होंने इस पर आपत्ति जताई। इसके बाद सदन में तीखी बहस देखने को मिली।

    “बड़े राज्य हावी हो जाएंगे” - रुहुल्लाह मेहदी

    रुहुल्लाह मेहदी ने कहा कि परिसीमन के बाद उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे बड़े राज्यों के पास इतनी सीटें हो सकती हैं कि वे छोटे राज्यों पर हावी हो जाएं। उन्होंने आशंका जताई कि इससे संसद में बराबरी का संतुलन खत्म हो सकता है। उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि हम लाचार हैं… परिसीमन के बाद स्थिति और खराब होगी।

    विवादित बयान से बढ़ा सियासी तापमान

    बहस के दौरान मेहदी ने कहा कि दक्षिण भारत, बंगाल और नॉर्थ ईस्ट को भी वही स्थिति समझनी चाहिए, जो कश्मीर ने झेली है। उनके इस बयान पर अमित शाह ने तुरंत आपत्ति जताई और कहा कि ये क्या बोल रहे हैं? इसके बाद सदन में माहौल और गरमा गया और दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई।

    ये भी पढ़ें: महिला आरक्षण के साथ ‘सीटों का बड़ा खेल’! 543 से 850 कैसे पहुंचेगी लोकसभा, अमित शाह ने समझाया क्या है परिसीमन का पूरा गणित

    जेरिमैंडरिंग का आरोप, निष्पक्षता पर सवाल

    मेहदी ने परिसीमन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसके जरिए “जेरिमैंडरिंग” की आशंका है। यानी चुनावी क्षेत्रों की सीमाओं को इस तरह बदला जा सकता है, जिससे किसी खास पार्टी या वर्ग को फायदा मिले। उन्होंने दावा किया कि जम्मू-कश्मीर में पहले भी ऐसे बदलाव देखे गए हैं, जिससे एक समुदाय का प्रभाव कम हुआ।

    धारा 370 हटाए जाने का जिक्र

    मेहदी ने 2019 में धारा 370 हटाए जाने का भी जिक्र किया और कहा कि उस समय भी जम्मू-कश्मीर की सहमति नहीं ली गई थी। उनका कहना था कि संसद ही एक ऐसा मंच है जहां जम्मू-कश्मीर के लोग अपनी बात रख सकते हैं, लेकिन अगर संसद में ही उनका प्रतिनिधित्व कमजोर हो जाएगा तो उनकी आवाज कौन सुनेगा। मेहदी ने यह भी कहा कि पहले से ही संसद में सीटों का संतुलन उत्तर भारत की ओर ज्यादा झुका हुआ है और अगर नया परिसीमन हुआ तो यह असंतुलन और बढ़ जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि इसका असर सिर्फ कश्मीर ही नहीं, बल्कि दक्षिण भारत, बंगाल और उत्तर-पूर्वी राज्यों पर भी पड़ेगा।

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    सरकार का पक्ष क्या है?

    हालांकि सरकार की ओर से बार-बार यह कहा जाता रहा है कि परिसीमन एक संवैधानिक प्रक्रिया है, जिसका मकसद जनसंख्या के आधार पर प्रतिनिधित्व को संतुलित करना है। सरकार का मानना है कि इससे लोकतंत्र और मजबूत होगा और हर क्षेत्र को उचित प्रतिनिधित्व मिलेगा।

    क्यों अहम है परिसीमन?

    परिसीमन यानी Delimitation वह प्रक्रिया है, जिसमें जनसंख्या के आधार पर लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाएं तय की जाती हैं। इसका सीधा असर चुनावी राजनीति और राज्यों की ताकत पर पड़ता है। इसी वजह से परिसीमन बिल 2026 को लेकर सियासत गरमा गई है और आने वाले समय में इस मुद्दे पर और भी बड़ी बहस देखने को मिल सकती है।

    Sona Rajput
    By Sona Rajput

    माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...Read More

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