'IMF और तुम दोनों भाड़ में जाओ' पेट्रोलियम लेवी पर भड़का पाकिस्तान ; करीची-लाहौर में सड़कों पर उतरे हजारों लोग

नई दिल्ली। पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार की पेट्रोलियम लेवी को लेकर गुस्सा सड़क पर उतर आया है। शुक्रवार को देश के कई शहरों में हजारों लोगों ने प्रदर्शन किया। इन प्रदर्शनों की अगुवाई धार्मिक-राजनीतिक संगठन जमात-ए-इस्लामी (JI) ने की। कराची और लाहौर समेत कई शहरों में प्रदर्शनकारियों ने रैलियां निकालीं और सरकार की पेट्रोलियम लेवी नीति के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख हाफिज नईम-उर-रहमान ने सरकार को चेतावनी दी कि पेट्रोलियम लेवी को खत्म करना होगा। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने मांग नहीं मानी तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। पार्टी ने आगे देशभर में प्रमुख सड़कों और हाईवे को जाम करने की चेतावनी भी दी है।
कराची से लाहौर तक सड़क पर उतरे लोग
कराची में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी मुख्य सड़कों पर पहुंचे। प्रदर्शन के दौरान कई प्रमुख मार्गों पर आवाजाही प्रभावित हुई। इससे शहर में ट्रैफिक व्यवस्था पर भी असर पड़ा। लाहौर में भी जमात-ए-इस्लामी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने बड़ी रैली निकाली और सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। जमात-ए-इस्लामी ने इस विरोध को सिर्फ पेट्रोल की कीमतों तक सीमित नहीं रखा है। पार्टी पेट्रोलियम लेवी के साथ बिजली की महंगी दरों और बढ़ती महंगाई का मुद्दा भी उठा रही है। संगठन का आरोप है कि सरकारी नीतियों का सबसे ज्यादा बोझ आम लोगों और गरीब परिवारों पर पड़ रहा है।
क्या है पेट्रोलियम लेवी, जिस पर मचा बवाल?
पाकिस्तान सरकार पेट्रोल, डीजल और केरोसिन जैसे पेट्रोलियम उत्पादों पर पेट्रोलियम डेवलपमेंट लेवी (PDL) लगाती है। यह सरकार के लिए राजस्व जुटाने का एक महत्वपूर्ण जरिया है। लेकिन इस लेवी के कारण ईंधन की कीमतों पर पड़ने वाला अतिरिक्त बोझ आम उपभोक्ताओं के लिए परेशानी बढ़ाता है। जमात-ए-इस्लामी इसी लेवी को खत्म करने की मांग कर रही है। पार्टी का कहना है कि सरकार को जनता पर नए आर्थिक बोझ डालने के बजाय अपनी नीतियों में बदलाव करना चाहिए।
हाफिज नईम ने शहबाज सरकार को दी चेतावनी
लाहौर की रैली में जमात-ए-इस्लामी प्रमुख हाफिज नईम-उर-रहमान ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और उनकी कैबिनेट पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार को पेट्रोलियम लेवी वापस लेनी होगी। रहमान ने सरकार की उस दलील पर भी सवाल उठाया, जिसमें अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की शर्तों का हवाला दिया जाता है। उन्होंने तीखे अंदाज में कहा कि भाड़ में जाएं आप और भाड़ में जाए आपका IMF। उन्होंने गरीबों और छात्रों पर आर्थिक बोझ डालने का आरोप लगाते हुए कहा कि लोगों के अधिकारों को किसी तरह की खैरात नहीं समझा जाना चाहिए। उनके मुताबिक सरकार को आम जनता की परेशानी को समझते हुए पेट्रोलियम लेवी खत्म करनी चाहिए।
'मांग नहीं मानी तो कराची से चित्राल तक जाम करेंगे हाईवे'
जमात-ए-इस्लामी ने आंदोलन को आगे बढ़ाने की योजना भी सामने रखी है। हाफिज नईम-उर-रहमान ने कहा कि अगर सरकार ने पेट्रोलियम लेवी को खत्म नहीं किया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। पार्टी की ओर से कराची से चित्राल तक प्रमुख हाईवे और सड़कों को जाम करने की चेतावनी दी गई है। हालांकि, पार्टी ने कहा है कि एंबुलेंस और अन्य जरूरी आपातकालीन वाहनों को रास्ता दिया जाएगा।
'IPP माफिया' के खिलाफ भी मोर्चा
पेट्रोलियम लेवी के अलावा जमात-ए-इस्लामी ने स्वतंत्र बिजली उत्पादकों यानी IPPs से जुड़े समझौतों को भी निशाने पर लिया है। पार्टी इन्हें 'IPP माफिया' कहकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रही है। हाफिज नईम-उर-रहमान का आरोप है कि इन समझौतों की वजह से सरकारी खजाने पर भारी आर्थिक बोझ पड़ा है। पार्टी का कहना है कि बिजली और ईंधन की बढ़ती कीमतों का सीधा असर आम परिवारों की जेब पर पड़ रहा है।












