
इस्लामाबाद/नई दिल्ली। पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी 4 मई को भारत दौरे पर नई दिल्ली पहुचेंगे। वे 4-5 मई को गोवा में होने वाली विदेश मंत्रियों की SCO समिट में हिस्सा लेंगे। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इसकी पुष्टि की है। 2014 में पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के भारत दौरे के बाद पहली बार कोई पाकिस्तानी मंत्री भारत आएगा।
12 साल बाद भारत आएंगे पाक विदेश मंत्री
लगभग 12 वर्षों में इस तरह की यह पहली यात्रा होगी। हिना रब्बानी खार भारत आने वाली अंतिम पाकिस्तानी विदेश मंत्री थीं, जो जुलाई 2011 में भारत आईं थीं। वहीं अब पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो 4 मई 2023 को भारत आएंगे। बिलावल भुट्टो पाकिस्तान के सबसे युवा मंत्रियों में से एक हैं, उनकी उम्र 34 साल है। 27 अप्रैल 2022 को बिलावल मुल्क के 37वें विदेश मंत्री नियुक्त किए गए। वो ‘पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी’ के सदस्य हैं।
भुट्टो ने पीएम मोदी को कहा था कसाई
पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा था। बिलावल भुट्टो ने न्यूयॉर्क में अपनी प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कहा था कि, ओसामा बिन लादेन मर गया है, लेकिन गुजरात का कसाई नरेंद्र मोदी अभी तक जीवित है।
भारत कर रहा SCO बैठक की अध्यक्षता
- वर्तमान में SCO बैठक की अध्यक्षता भारत कर रहा है।
- SCO के अध्यक्ष के रूप में, भारत कई कार्यक्रमों की मेजबानी करने के लिए तैयार है, जिसमें सदस्य राज्यों के मुख्य न्यायाधीशों का एक सम्मेलन, विदेश मंत्रियों की बैठक और 2023 में एक शिखर सम्मेलन शामिल हैं।
- SCO एक पॉलिटिकल, इकोनॉमिकल और सिक्योरिटी ऑर्गेनाइजेशन है। भारत, रूस, चीन और पाकिस्तान समेत इसके कुल 8 स्थाई सदस्य हैं।
- शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन (SCO) का गठन 2001 में हुआ था। शुरुआत में SCO में छह सदस्य- रूस, चीन, कजाकिस्तान, तजाकिस्तान, किर्गिस्तान और उज्बेकिस्तान थे।
- 2017 में भारत और पाकिस्तान के भी इससे जुड़ने से इसके स्थाई सदस्यों की संख्या 8 हो गई।
- 6 देश- आर्मीनिया, कंबोडिया, नेपाल, अजरबैजान, श्रीलंका और टर्की SCO के डायलॉग पार्टनर हैं।
- 4 देश- अफगानिस्तान, ईरान, बेलारूस और मंगोलिया इसके ऑब्जर्वर सदस्य हैं।
- एससीओ में चीन और रूस के बाद भारत सबसे बड़ा देश है।
- SCO भारत के लिए एक ऐसा मंच है। जहां वो क्षेत्रीय मुद्दों पर चीन और पाकिस्तान के साथ रचनात्मक चर्चा में शामिल हो सकता है और अपने सुरक्षा हितों को उनके समक्ष रख सकता है।
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