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नई दिल्ली :वंदे मातरम् पर बयान देकर घिरे ओवैसी, भाजपा बोलीं- देश विरोधी सोच उजागर हुई...

ओवैसी ने अपने बयान में संविधान का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान की प्रस्तावना हम भारत के लोग से शुरू होती है, भारत माता से नहीं।
वंदे मातरम् पर बयान देकर घिरे ओवैसी, भाजपा बोलीं- देश विरोधी सोच उजागर हुई...

वंदे मातरम् को लेकर देश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग ने AIMIM प्रमुख असदुद्दीन के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि जो लोग वंदे मातरम् का विरोध कर रहे हैं, वे बौद्धिक रूप से बेईमान हैं और हास्यास्पद बयान दे रहे हैं।

‘वंदे मातरम् स्वतंत्रता सेनानियों का उद्घोष’- तरुण चुग

समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में तरुण चुग ने कहा कि वंदे मातरम् पिछले 150 वर्षों से देशभक्ति और स्वतंत्रता आंदोलन का प्रतीक रहा है। उन्होंने कहा, आज वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ है। इसे गाते हुए न जाने कितने क्रांतिकारी फांसी पर चढ़ गए और कितनों ने देश के लिए बलिदान दिया। अंग्रेजों के खिलाफ यह एक मंत्र की तरह काम करता था। उन्होंने आगे कहा कि जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं, वे राष्ट्र की भावनाओं को समझने में असफल रहे हैं।

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ओवैसी ने क्या कहा था?

दरअसल, AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने गुरुवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर वंदे मातरम् को लेकर एक पोस्ट किया था। उन्होंने कहा था कि वंदे मातरम् एक देवी की स्तुति है और इसे राष्ट्रगान के बराबर नहीं माना जा सकता। ओवैसी ने लिखा, जन गण मन भारत और उसके लोगों का उत्सव मनाता है, किसी एक धर्म का नहीं। धर्म राष्ट्र के बराबर नहीं है।

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‘संविधान भारत के लोगों से शुरू होता है’- ओवैसी

ओवैसी ने अपने बयान में संविधान का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान की प्रस्तावना हम भारत के लोग से शुरू होती है, भारत माता से नहीं। उन्होंने कहा कि संविधान विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास और पूजा की स्वतंत्रता की गारंटी देता है।

ओवैसी ने यह भी दावा किया कि संविधान सभा में कुछ सदस्यों ने प्रस्तावना को देवी या भगवान के नाम से शुरू करने की मांग की थी, लेकिन इसे स्वीकार नहीं किया गया।

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ऐतिहासिक संदर्भ का भी किया जिक्र

ओवैसी ने अपने पोस्ट में वंदे मातरम् के रचयिता बंकिम चंद्र चटोपाध्याय का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बंकिम चंद्र ब्रिटिश राज के प्रति सहानुभूति रखते थे और मुसलमानों के प्रति उनका दृष्टिकोण नकारात्मक था। उन्होंने दावा किया कि सुभाषचंद्र बोष, महात्मा गांधी और रविंद्रनाथ टैगोर ने भी इसे पूरी तरह स्वीकार नहीं किया था। वंदे मातरम् को लेकर दोनों नेताओं के बयानों के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।

Aakash Waghmare
By Aakash Waghmare

आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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