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सिर्फ ब्रेसेस ही नहीं करते दांतों को सीधा, रिटेनर लगाने पर ही मिलेगा सही रिजल्ट

नेशनल रिटेनर डे : 40 फीसदी लोग नहीं कराते हैं दांतों का पूरा ट्रीटमेंट
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सिर्फ ब्रेसेस ही नहीं करते दांतों को सीधा, रिटेनर लगाने पर ही मिलेगा सही रिजल्ट
प्रीति जैन- स्माइल को खूबसूरत बनाने के लिए एस्थेटिक डेंटिस्ट्री का चलन बढ़ रहा है, जिसमें लोग अपने आड़े-तिरछे और बाहर की तरफ निकल रहे दांतों को डेंटिस्ट से ठीक कराते हैं। इसके लिए मेटल ब्रैकेट (ब्रेसेस), सिरेमिक ब्रैकेट और अलाइनर्स दांतों में लगाए जाते हैं। लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि दांतों को सेट करने के बाद भी एक ट्रीटमेंट जारी रहता है, जिसे लगभग 40 फीसदी लोग नजरअंदाज करते हैं और फिर सोच में पड़ जाते हैं कि महंगा ट्रीटमेंट करने के बाद भी दांत वापस बाहर या आड़े-तिरछे कैसे हो गए। इसके लिए यह जानना जरूरी है कि दांतों को ब्रैकेट या अलाइनर से सेट कराने के बाद 6 महीने से दो साल तक रिटेनर्स भी लगाए रखना होते हैं, जो कि दांतों के सेट होने के बाद पीछे की तरफ लगाए जाते हैं।

दांतों के पीछे लगाते हैं रिटेनर

रिटेनर्स को ब्रेसेस या अलाइनर्स हटा देने के बाद फाइनल ट्रीटमेंट के रूप में लगाया जाता है। यह दो तरह के होते हैं, एक जिन्हें पेशेंट जब चाहे निकाल सकता है और यह ट्रांसपेरेंट होते हैं। दूसरा, दांतों के पीछे वायर के रूप में फिक्स होते हैं, इन्हें निकाल नहीं सकते लेकिन इनका रिजल्ट ज्यादा अच्छा आता है।

दो तरह के होते हैं रिटेनर्स

ब्रेसेस, ब्रैकेट और ट्रांसपेरेंट अलाइनर लगाए जाते हैं, जब दांतों को सीधा रखने का इनका समय पूरा हो जाता है, तब रिटेनर लगाए जाते हैं। बिना इसके दांतों के पीछे की ओर खिसकने और फिर से टेढ़े होने की संभावना होती है। दांतों के लिए दो मुख्य प्रकार के रिटेनर होते हैं, फिक्स्ड और रिमूवेबल। ब्रेसेस की मदद से दांत सीधे होने के बाद भी, वे अपनी नई स्थिति में पूरी तरह से स्थिर नहीं होते हैं। ऐसा तब तक नहीं होता जब तक मसूड़े, हड्डियां और मांसपेशियां बदलाव के आदी नहीं हो जाते। चबाने और पीसने जैसी आदतें दांतों पर दबाव डालती हैं और उन्हें हिला सकती हैं। इससे मैलोक्ल्यूजन भी हो सकता है। ऐसा तब होता है, जब ऊपरी और निचले दांत मुंह के बंद होने पर अलाइन नहीं होते हैं। -डॉ. रितेश सहगल, डेंटिस्ट

ब्रेसेस हटाने के बाद पिछली स्थिति में चले जाते हैं दांत

ब्रेसेस दांतों को लंबे समय तक सीधी स्थिति में रखते हैं। एक बार जब ब्रेसेस हटा दिए जाते हैं, तो आपके दांतों को उनकी पिछली स्थिति में वापस जाने से कोई नहीं रोक सकता। रिटेनर पहनने से आपके दांत सही जगह पर रहते हैं, इसलिए वे हिलते नहीं हैं। इसे इस तरह से सोचें, ब्रेसेस आपके दांतों को सीधा करते हैं, लेकिन आपका रिटेनर उन्हें उसी तरह रखता है। वे आपके दांतों को उनकी स्थिति बनाए रखने में मदद करते हैं। 40 फीसदी पेशेंट ब्रेसेस या अलाइनर्स लगाने का ट्रीटमेंट पूरा होने के बाद या तो रिटेनर को गंभीरता से नहीं लेते या लगाते नहीं है, जिससे उनकी सारी मेहनत और खर्चा बेकार हो जाता है। -डॉ. विपल्व जोशी, डेंटिस्ट
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By People's Reporter
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