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ईरान युद्ध में कूदेगा नॉर्थ कोरिया?किम जोंग उन की चेतावनी से बढ़ी दुनिया की चिंता, बोले- खतरा हुआ तो ‘पूरी तरह तबाह’ कर देंगे

ईरान में जारी युद्ध के बीच नॉर्थ कोरिया के नेता किम जोंग उन की चेतावनी ने दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने कहा है कि, ईरान में नॉर्थ कोरियाई नागरिकों को नुकसान हुआ तो प्योंगयांग हस्तक्षेप कर सकता है। बढ़ते सैन्य तनाव, डूबे वॉरशिप और अंतरराष्ट्रीय राजनीति के बीच यह संकट बड़े वैश्विक टकराव में बदल सकता है।
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किम जोंग उन की चेतावनी से बढ़ी दुनिया की चिंता, बोले- खतरा हुआ तो ‘पूरी तरह तबाह’ कर देंगे
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    मिडिल ईस्ट में जारी तनाव अब सिर्फ क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रह गया है। हालात इस कदर बिगड़ते जा रहे हैं कि दुनिया के कई बड़े देश सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से इसमें शामिल होते दिखाई दे रहे हैं। इसी बीच नॉर्थ कोरिया के नेता किम जोंग उन का एक सख्त बयान सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, किम जोंग उन ने अंतरराष्ट्रीय गठबंधन को चेतावनी दी है कि ईरान में मौजूद नॉर्थ कोरियाई नागरिकों को यदि कोई नुकसान पहुंचता है तो प्योंगयांग चुप नहीं बैठेगा। उन्होंने कहा कि, अपने नागरिकों की सुरक्षा नॉर्थ कोरिया के लिए किसी भी तरह की मोलभाव की चीज नहीं है। किम ने कहा है कि, उनके देश की सुरक्षा को खतरा हुआ तो वे साउथ कोरिया को ‘पूरी तरह नष्ट’ कर सकते हैं। इस बयान ने पहले से ही अस्थिर मिडिल ईस्ट संकट को और खतरनाक बना दिया है। 

    इजरायल के बयान के बाद बढ़ा तनाव

    इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का एक बयान भी काफी चर्चा में है। उन्होंने हाल ही में ईरान को 50 नॉर्थ कोरिया जैसा खतरा बताया था। इस बयान का मतलब यह था कि ईरान की सैन्य और परमाणु महत्वाकांक्षाएं दुनिया के लिए उसी तरह का खतरा बन सकती हैं जैसा नॉर्थ कोरिया को लेकर लंबे समय से माना जाता रहा है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि, नेतन्याहू का यह बयान ईरान और उसके सहयोगी देशों को सीधे चुनौती देने जैसा था। ऐसे में किम जोंग उन की प्रतिक्रिया को भी उसी संदर्भ में देखा जा रहा है।

    नागरिकों की सुरक्षा पर सख्त रुख

    नॉर्थ कोरिया ने अपने बयान में साफ कहा है कि ईरान में मौजूद उसके नागरिकों की सुरक्षित वापसी किसी भी बातचीत का विषय नहीं हो सकती। रिपोर्ट्स के अनुसार प्योंगयांग ने संकेत दिया है कि यदि वहां रहने वाले नॉर्थ कोरियाई लोगों को नुकसान पहुंचता है तो वह सैन्य विकल्पों पर भी विचार कर सकता है।

    हालांकि, इस बयान की स्वतंत्र पुष्टि सभी अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों द्वारा नहीं की गई है, लेकिन इस तरह की चेतावनी सामने आने से वैश्विक कूटनीति में हलचल जरूर बढ़ गई है।

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    युद्ध का सैन्य मोर्चा: तेजी से बिगड़ते हालात

    ईरान और उसके विरोधियों के बीच सैन्य हालात भी लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। हाल की घटनाओं ने इस संघर्ष को और खतरनाक बना दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान का एक वॉरशिप डूब गया है। IRIS फतेह नाम की सबमरीन कथित तौर पर नष्ट कर दी गई। कई सैन्य ठिकानों को भी नुकसान पहुंचा है।

    इन घटनाओं से यह साफ है कि, यह संघर्ष सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीन और समुद्र दोनों जगह सैन्य कार्रवाई जारी है।

    अमेरिका के अंदर भी बढ़ी राजनीतिक खींचतान

    इस युद्ध को लेकर अमेरिका के भीतर भी मतभेद देखने को मिल रहे हैं। वाशिंगटन में अमेरिकी कांग्रेस ने आगे के हमलों को रोकने के लिए वोट किया है। यह फैसला इस बात का संकेत है कि अमेरिकी राजनीति में भी इस युद्ध को लेकर सहमति नहीं है।

    उधर पेंटागन ने युद्ध में हुए नुकसान को लेकर एक बड़ी मांग रखी है। रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी रक्षा विभाग ने करीब 50 अरब डॉलर की अतिरिक्त राशि मांगी है, ताकि लगभग 2 अरब डॉलर के खोए सैन्य उपकरणों को बदला जा सके। यह मांग इस बात की ओर इशारा करती है कि संघर्ष में संसाधनों की भारी खपत हो रही है।

    रूस की नई रणनीति

    इस पूरे संकट के बीच रूस की भूमिका भी चर्चा में है। खबरें हैं कि तेहरान के नेतृत्व से संपर्क टूटने के बाद रूस ईरान की परमाणु सुविधाओं को सुरक्षित करने की तैयारी कर रहा है। रूस पहले से ही ईरान के साथ रणनीतिक रिश्ते बनाए हुए है। ऐसे में यदि वह इस संकट में सक्रिय भूमिका निभाता है तो शक्ति संतुलन और बदल सकता है।

    विश्लेषकों का कहना है कि, रूस का यह कदम सिर्फ ईरान की सुरक्षा के लिए नहीं बल्कि अपने भू-राजनीतिक हितों की रक्षा के लिए भी हो सकता है।

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    NATO भी हाई अलर्ट पर

    मिडिल ईस्ट संकट का असर यूरोप तक पहुंच चुका है। तुर्की में एक बैलिस्टिक मिसाइल को इंटरसेप्ट किए जाने के बाद NATO की सेनाओं को हाई अलर्ट पर रखा गया है। इस कदम से यह साफ है कि, पश्चिमी देशों को आशंका है कि यह संघर्ष फैलकर उनके सुरक्षा हितों को भी प्रभावित कर सकता है। यदि इस तरह की घटनाएं बढ़ती हैं तो NATO देशों की प्रत्यक्ष भागीदारी की संभावना भी बढ़ सकती है।

    ऊर्जा संकट का नया खतरा

    युद्ध का असर सिर्फ सैन्य और राजनीतिक मोर्चे पर ही नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। खबर है कि कतर में गैस उत्पादन बाधित होने के कारण वहां आपात स्थिति जैसी स्थिति बन गई है। कतर दुनिया के सबसे बड़े प्राकृतिक गैस निर्यातकों में से एक है। यदि वहां उत्पादन लंबे समय तक प्रभावित रहता है तो इसका असर दुनिया भर के ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि, इससे गैस और तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।

    स्पेन ने बदली रणनीति

    इस संकट के बीच यूरोप की राजनीति में भी बदलाव दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार स्पेन ने हाल ही में भारी व्यापारिक टैरिफ का सामना करने के बाद अमेरिका के साथ सहयोग करने का फैसला किया है। यह कदम दर्शाता है कि युद्ध के दबाव के बीच कई देश अपने आर्थिक और रणनीतिक हितों को देखते हुए नए गठबंधन बना रहे हैं।

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    क्या यह संघर्ष वैश्विक युद्ध में बदल सकता है?

    दुनिया के कई सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात बेहद संवेदनशील हैं। एक तरफ अमेरिका और उसके सहयोगी देश हैं, जबकि दूसरी तरफ ईरान, रूस और कुछ अन्य देश हैं जो अलग रुख अपना रहे हैं। यदि नॉर्थ कोरिया जैसे परमाणु हथियार संपन्न देश भी इस विवाद में सीधे उतरते हैं तो यह टकराव बेहद खतरनाक रूप ले सकता है।

    किम जोंग उन का बयान क्यों अहम है

    किम जोंग उन का बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि नॉर्थ कोरिया लंबे समय से अपनी परमाणु और मिसाइल क्षमता को बढ़ा रहा है। प्योंगयांग के पास इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलें, परमाणु हथियार और लंबी दूरी की सैन्य क्षमता मौजूद है।

    ऐसे में अगर वह किसी भी रूप में इस संघर्ष में शामिल होता है तो इससे वैश्विक सुरक्षा समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।

    दुनिया की नजरें मिडिल ईस्ट पर

    फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें मिडिल ईस्ट के घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं। एक तरफ युद्ध की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है, वहीं दूसरी ओर कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि आने वाले दिनों में यह संकट किस दिशा में जाएगा। लेकिन इतना तय है कि, किम जोंग उन की चेतावनी ने इस संघर्ष को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया है। अगर हालात काबू में नहीं आए तो यह विवाद सिर्फ क्षेत्रीय संघर्ष नहीं बल्कि बड़े वैश्विक टकराव की शुरुआत भी बन सकता है।

    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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