लागों को बड़े मुनाफे का सपना दिखाकर ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट के नाम पर ठगी करने वाले एक शातिर इंटरस्टेट साइबर गैंग का दिल्ली क्राइम ब्रांच ने पर्दाफाश किया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह सिर्फ दिल्ली ही नहीं बल्कि पंजाब और राजस्थान समेत कई राज्यों में सक्रिय था और बड़े ही योजनाबद्ध तरीके से लागों को अपने जाल में फंसाता था। इस कार्रवाई में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। मामले की पूछताछ के दौरान करीब 33.83 लाख रुपये की ठगी का खुलासा हुआ है।
जांच में पता चला कि आरोपी नए-नए लोगों को निशाना बनाकर सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म के जरिए लागों से संपर्क किया करते थे। वे खुद को किसी भरोसेमंद कंपनी का प्रतिनिधि या इन्वेस्टमेंट एक्सपर्ट बताकर लागों का विश्वास जीतते थे। इसके बाद उन्हें कम समय में ज्यादा मुनाफे का लालच दिया जाता था। शुरुआत में गैंग छोटी रकम पर नकली मुनाफा दिखाकर पीड़ित का भरोसा जीता करती थी। फिर जैसे ही व्यक्ति बडी रकम निवेश करता जिसके तुरंत बाद ही आरोपी उससे संपर्क तोड़ देते थे। इस तरह यह गिरोह लगातार अलग अलग लोगों को निशाना बनाकर ठगी किया करती थी।
पुलिस के अनुसार आरोपियों ने ठगी के रकम को छिपाने के लिए बेहद चालाकी से काम लिया। उन्होंने किराए के बैंक खातों का इस्तेमाल किया। आरोपियों ने कुल 15 अलग-अलग खातों के जरिए पैसे ट्रांसफर किए। जिसमें से 13 खाते दिल्ली के बाहर के थे। इस तरह पैसे को अलग-अलग खातों में घुमाकर मनी ट्रेल को छिपाने की कोशिश की गई, ताकि पुलिस के लिए असली आरोपी तक पहुंचना मुश्किल हो जाए। हालांकि पलिस ने तकनीकी जांच के जरिए पूरे नेटवर्क को ट्रैक कर लिया।
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पुलिस जांच में सामने आया कि इस साइबर गैंग में हर सदस्य की जिम्मेदारियां पहले से बंटी हुई थीं। कोई बैंक खाते उपलब्ध कराता था, तो कोई फर्जी सिम कार्ड का इंतजाम करता था। वहीं कुछ लोग बिचौलिये के तौर पर काम करते थे, जो पीड़ितों को फंसाने में अहम भूमिका निभाते थे। जांच में यह भी सामने आया कि बैंक खाते उपलब्ध कराने वालों को 5 हजार से 15 हजार रुपये तक का कमीशन दिया जाता था। इस लालच में कई लोग अपनी जानकारी और खाते गिरोह को दे देते थे, जो बाद में ठगी के काम में इस्तेमाल होते थे।
क्राइम ब्रांच ने इस मामले की जांच के दौरान आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया। पुलिस ने 100 से ज्यादा कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDRs) खंगाले, IMEI नंबर ट्रैक किए और IP एड्रेस की जांच की गई । इसी तकनीकी जांच के आधार पर आरोपियों की पहचान हुई और उन्हें गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, आरोपियों के पास से 3 मोबाइल फोन और 3 सिम कार्ड बरामद किए गए हैं, जिनका इस्तेमाल ठगी के लिए किया जा रहा था।
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गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में यह भी सामने आया कि यह गैंग एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा है, जो कई राज्यों में फैला हुआ है। दिल्ली, पंजाब और राजस्थान में इनकी गतिविधियां सबसे ज्यादा थीं। क्राइम ब्रांच की टीम ने इस गिरोह तक पहुंचने के लिए कई जगहों पर छापेमारी की, जिसमें राजस्थान के जोधपुर में भी कार्रवाई की गई। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है।
क्राइम ब्रांच के अधिकारियों के अनुसार यह गैंग बेहद सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था। लोगों को निवेश का लालच देकर उन्हें मानसिक रूप से तैयार किया जाता था और फिर बड़ी रकम ऐंठ ली जाती थी। आधिकारियों कहना है कि हम इस नेटवर्क से जुड़े बाकी लोगों की पहचान करने में जुटे हैं। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है और ठगी की कुल रकम कितनी है।
इस तरह के मामलों को देखते हुए पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि वे किसी भी ऑनलाइन निवेश ऑफर पर आंख बंद करके भरोसा न करें। खासकर ऐसे ऑफर जो कम समय में ज्यादा मुनाफा देने का दावा करते हैं, उनसे सावधान रहना जरूरी है। किसी भी अनजान लिंक, कॉल या मैसेज के जरिए निवेश करने से पहले उसकी पूरी जांच करें और केवल भरोसेमंद प्लेटफॉर्म का ही इस्तेमाल करें।