Strait Of Hormuz :होर्मुज बंद होते ही भारत के सामने फिर बढ़ी मुसीबत, 4 ऐसे क्षेत्र जिस पर लगेगा सबसे ज्यादा झटका

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट बंद करने की चेतावनी ने दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव के बीच भारत के व्यापारिक संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने आशंका जताई है कि अगर यह समुद्री मार्ग लंबे समय तक बंद रहा तो भारत को तेल, महंगाई और व्यापार के मोर्चे पर बड़ा झटका लग सकता है।
क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्ग माना जाता है। वैश्विक स्तर पर करीब 20% कच्चा तेल और बड़ी मात्रा में गैस इसी रास्ते से गुजरती है। भारत भी अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस मार्ग पर काफी हद तक निर्भर है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का व्यवधान सीधे भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
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5 बड़ी बातें, जो आपके लिए जानना जरूरी हैं
1. पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बड़ा उछाल आ सकता है
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। अगर होर्मुज स्ट्रेट बंद होता है तो तेल की सप्लाई प्रभावित होगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। इसका सीधा असर पेट्रोल और डीजल के दामों पर पड़ेगा, जिससे आम लोगों की जेब पर बोझ बढ़ेगा।
2. महंगाई फिर से बढ़ सकती है
ईंधन महंगा होने का असर केवल पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहेगा। ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ने से खाने-पीने की चीजें, कपड़े, घरेलू सामान और अन्य जरूरी वस्तुएं भी महंगी हो सकती हैं। व्यापारिक संगठनों का अनुमान है कि मौजूदा महंगाई दर में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
3. विमान यात्रा और उद्योगों की लागत बढ़ेगी
एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) महंगा होने से हवाई टिकटों के दाम बढ़ सकते हैं। वहीं पेंट, प्लास्टिक, टायर, केमिकल और ऑटोमोबाइल जैसे उद्योगों की उत्पादन लागत भी बढ़ जाएगी। इससे कंपनियों और उपभोक्ताओं दोनों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ सकता है।
4. व्यापार और शिपिंग पर पड़ेगा असर
अगर तेल टैंकरों को वैकल्पिक समुद्री रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ा तो माल ढुलाई की लागत कई गुना बढ़ सकती है। इससे आयात और निर्यात दोनों महंगे होंगे। व्यापारियों का कहना है कि परिवहन लागत बढ़ने से बाजार में वस्तुओं की कीमतों पर भी असर दिखाई देगा।
5. भारत के पास कितनी तैयारी है?
भारत के पास रणनीतिक तेल भंडार मौजूद हैं, जो कुछ समय तक राहत दे सकते हैं। इसके अलावा भारत रूस समेत अन्य देशों से भी तेल आयात करता है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संकट लंबा खिंचता है तो केवल वैकल्पिक स्रोतों के भरोसे मांग पूरी करना आसान नहीं होगा।
सरकार और बाजार की नजर हालात पर
फिलहाल भारत सरकार और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ पश्चिम एशिया के हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। यदि तनाव और बढ़ता है और होर्मुज स्ट्रेट लंबे समय तक प्रभावित रहता है, तो इसका असर सिर्फ तेल बाजार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि महंगाई, उद्योग, व्यापार और आम लोगों के दैनिक खर्च पर भी साफ दिखाई दे सकता है।
उर्वरक और खेती पर भी पड़ सकता है असर
होर्मुज स्ट्रेट में किसी भी तरह की लंबी रुकावट का असर सिर्फ तेल और गैस तक सीमित नहीं रहेगा। भारत यूरिया समेत कई प्रमुख उर्वरकों (फर्टिलाइजर) के आयात के लिए भी खाड़ी देशों पर निर्भर है। ऐसे में अगर आपूर्ति प्रभावित होती है तो किसानों को उर्वरकों की उपलब्धता और कीमतों से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसका असर खेती की लागत बढ़ने और कृषि उत्पादन पर भी पड़ सकता है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल सरकार और तेल कंपनियों के पास रणनीतिक और वाणिज्यिक भंडार मौजूद हैं, जिससे तत्काल किसी बड़े संकट की आशंका नहीं है। लेकिन यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो कृषि क्षेत्र भी इसकी मार से अछूता नहीं रहेगा।











