इंटरनेशनल डेस्क। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले 48 घंटों में नागरिकों, धार्मिक स्थलों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है। रविवार को उन्होंने डिमोना और अराद शहर में मिसाइल हमलों वाली जगहों का दौरा किया। उन्होंने कहा कि ईरान ने आम लोगों को भी निशाना बनाया, जहां बच्चों का डे-केयर सेंटर और बुजुर्गों का घर मौजूद था। नेतन्याहू के मुताबिक, ईरान प्रतिबंधित क्लस्टर बम जैसे हथियारों का इस्तेमाल कर रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है और वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
नेतन्याहू ने दुनिया के नेताओं से अपील की कि अब समय आ गया है कि वे खुलकर इस लड़ाई में शामिल हों। उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि अमेरिका और इजरायल केवल अपने लिए नहीं बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए लड़ रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अन्य देश कब तक इंतजार करेंगे और कहा कि अब निर्णायक कदम उठाने का समय है, ताकि इस खतरे को रोका जा सके। उनके बयान को पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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नेतन्याहू ने आरोप लगाया कि ईरान ने यरुशलम के पास स्थित पवित्र धार्मिक स्थलों को भी निशाना बनाया। उनके अनुसार बैलिस्टिक मिसाइलें ऐसे इलाकों में गिरीं, जहां से चर्च ऑफ द होली सेपल्चर, अल-अक्सा मस्जिद और वेस्टर्न वॉल जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल खतरे में आ सकते थे। उन्होंने कहा कि ये स्थान दुनिया के प्रमुख धर्मों के लिए बेहद पवित्र हैं, लेकिन ईरान ने इसकी परवाह नहीं की।
इजरायल की एयर फोर्स और होम फ्रंट कमांड डिमोना में हुए हमले की जांच कर रहे हैं। डिमोना नेगेव रेगिस्तान में स्थित शहर है, जो बेर्शेबा से लगभग 30 किमी दूर है और शिमोन पेरेस नेगेव न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर के पास स्थित माना जाता है। नेतन्याहू ने आरोप लगाया कि ईरान ने लगभग 4000 किमी दूर स्थित डिएगो गार्सिया में अमेरिका-ब्रिटेन के सैन्य ठिकाने को भी निशाना बनाया है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर तेल आपूर्ति प्रभावित की है और दुनिया पर “ऑयल ब्लैकमेल” करने की कोशिश कर रहा है।