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क्या है पूरा मामला:NCERT किताब से सुप्रीम कोर्ट तक कैसे पहुंचा विवाद? CJI ने जताई नाराजगी

कक्षा 8 की नई सोशल साइंस किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ नाम का अध्याय शामिल किए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। इस अध्याय में अदालतों में लंबित मामलों, जजों की कमी और न्यायिक व्यवस्था की चुनौतियों का जिक्र किया गया था। मामले को सुप्रीम कोर्ट में उठाया गया, जिस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने संज्ञान लेते हुए कहा कि न्यायपालिका को बदनाम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी और जल्द सुनवाई होगी।
NCERT किताब से सुप्रीम कोर्ट तक कैसे पहुंचा विवाद? CJI ने जताई नाराजगी
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    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    National Council of Educational Research and Training (NCERT) ने क्लास 8 के लिए सोशल साइंस की नई किताब जारी की है। इस बार किताब में सिर्फ अदालतों की संरचना नहीं, बल्कि न्यायपालिका के सामने खड़ी असली चुनौतियों पर भी खुलकर चर्चा की गई है।

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    सुप्रीम कोर्ट ने लिया संज्ञान

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    नई किताब में एक अध्याय जोड़ा गया है, जिसमें न्यायपालिका में भ्रष्टाचार, लंबित मामलों की समस्या और जजों की कमी जैसे मुद्दों को समझाया गया है। यह बदलाव इसलिए खास है क्योंकि पहले की कितबों में इन बातों का विस्तार से जिक्र नहीं था। 

    मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ वाले अध्याय पर नाराजगी जताई है। उन्होंने साफ कहा कि किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी और कानून अपना काम करेगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कोर्ट इस मामले में खुद कार्रवाई करने पर विचार कर रहा है।

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    CJI की टिप्पणी के बाद फिलहाल यह किताब National Council of Educational Research and Training (NCERT) की आधिकारिक वेबसाइट पर दिखाई नहीं दे रही है। हालांकि इस पर NCERT की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर जल्द सुनवाई का आश्वासन दिया है। यानी आने वाले दिनों में यह मामला अदालत में विस्तार से सुना जा सकता है।

    न्यायपालिका के सामने कौन-कौन सी चुनौतियां?

    1. भ्रष्टाचार की समस्या

    किताब में बताया गया है कि न्यायपालिका के अलग-अलग स्तरों पर लोगों को भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ सकता है। इससे आम लोगों का भरोसा कमजोर होता है। खासकर गरीब और कमजोर वर्ग के लिए न्याय तक पहुंच और भी मुश्किल हो जाती है।

    2. लंबित मामलों का बोझ

    नई किताब में अदालतों में लंबित मामलों के आंकड़े भी दिए गए हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि केसों की संख्या बहुत ज्यादा है। सुप्रीम कोर्ट में लगभग 81,000 मामले लंबित हैं। हाईकोर्ट में करीब 62 लाख 40 हजार मामले लंबित हैं। जिला और अधीनस्थ अदालतों में लगभग 4 करोड़ 70 लाख मामले लंबित हैं। इतने बड़े स्तर पर पेंडिंग केस होना न्याय मिलने में देरी का बड़ा कारण माना गया है।

    3. जजों की कमी

    किताब में यह भी बताया गया है कि अदालतों में जजों की संख्या जरूरत से कम है। जब मामलों की संख्या ज्यादा और जज कम हों, तो फैसला आने में समय लगना स्वाभाविक है। इसके अलावा कानून की प्रक्रिया जटिल और लंबी बताई गई है। कई बार अदालतों में बुनियादी सुविधाओं और तकनीक की कमी भी कामकाज को धीमा करती है।

    आचार संहिता और जवाबदेही

    किताब में लिखा है कि जज एक आचार संहिता से बंधे होते हैं। इसका मतलब है कि उन्हें कोर्ट के अंदर और बाहर दोनों जगह गरिमा और नियमों का पालन करना होता है।

    शिकायत कहां करें?

    अगर किसी व्यक्ति को न्यायपालिका से जुड़ी शिकायत है, तो वह CPGRAMS (सेंट्रलाइज्ड पब्लिक ग्रीवेंस रिड्रेस एंड मॉनिटरिंग सिस्टम) पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर सकता है किताब के अनुसार, साल 2017 से 2021 के बीच इस सिस्टम के जरिए 1600 से ज्यादा शिकायतें दर्ज की गई थीं। यह बताता है कि शिकायत दर्ज करने की एक तय प्रक्रिया मौजूद है।

    पूर्व CJI का बयान भी शामिल

    नई किताब में पूर्व मुख्य न्यायाधीश B. R. गवई का बयान भी शामिल किया गया है। जुलाई 2025 में उन्होंने कहा था कि न्यायपालिका के भीतर भ्रष्टाचार और कदाचार की घटनाएं जनता के भरोसे को नुकसान पहुंचाती हैं। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि पारदर्शी और तेज कार्रवाई से विश्वास दोबारा बनाया जा सकता है।

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    फिलहाल निगाहें सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं।

    Garima Vishwakarma
    By Garima Vishwakarma

    गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...

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