
नेशनल डेस्क। एनसीईआरटी ने अपनी 12वीं कक्षा की राजनीति विज्ञान की किताब में कुछ बदलाव कर दिए हैं। इसके तहत बाबरी मस्जिद विध्वंस और रथयात्रा से जुड़े चैप्टर को हटा दिया गया है। एनसीईआरटी द्वारा किए गए इन बदलावों ने शिक्षा क्षेत्र में बहस छेड़ दी है।
हिंसा नहीं हो सकती शिक्षा का विषय
एनसीईआरटी के निदेशक दिनेश प्रसाद सकलानी ने इन बदलावों पर कहा कि घृणा और हिंसा शिक्षा के विषय नहीं हैं इसलिए इन्हें स्कूली किताबों में नहीं होना चाहिए। उनका कहना है कि कोर्स में किया गया बदलाव सालाना होने वाली संशोधन प्रक्रिया का हिस्सा है और इसका मकसद विद्यार्थियों को सकारात्मक नागरिक बनाना है। सकलानी ने एक न्यूज एजेंसी को दिए इंटरव्यू में कहा कि यह इस दिशा में भारतीय ज्ञान प्रणाली को ज्यादा बेहतर करने का प्रयास है।
विपक्ष ने उठाए सवाल
विपक्ष का कहना है कि यह बदलाव इतिहास के एक महत्वपूर्ण हिस्से को छिपाने का प्रयास है। विपक्षी दलों की तरफ से आई प्रतिक्रिया में कहा गया है कि छात्रों को देश के इतिहास की पूरी जानकारी होनी चाहिए, जिसमें विवादास्पद घटनाएं भी शामिल हैं। गौरतलब है कि यह बदलाव 2014 में एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों में किए गए संशोधनों का चौथा चरण है। इधर एनसीईआरटी के इस कदम पर सोशल मीडिया पर भी रिएक्शन आ रहे हैं। कुछ लोग बदलावों का समर्थन कर रहे हैं, जबकि अन्य इसका विरोध कर रहे हैं।
ये हुए किताब में बदलाव
पुरानी टेक्स्ट बुक में बताया गया था कि 16वीं शताब्दी में मुगल बादशाह बाबर के सेनापति मीर बाकी ने बाबरी मस्जिद बनवाई थी। वहीं, अब इस नए अध्याय में बताया गया है कि 1528 में श्री राम के जन्मस्थान पर तीन गुंबद वाला ढांचा बना दिया गया था। हालांकि, इस ढांचे में कई सनातन चिन्ह बने हुए थे। इसके अलावा अंदर और बाहर की दीवारों पर मूर्तियां भी बनी हुई थीं। पुरानी किताब में दो पेज में यही बताया गया था कि फैजाबाद जिला कोर्ट ने 1986 में मस्जिद खोलने का फैसला लिया था और 1992 में राम मंदिर बनाने के लिए रथ यात्रा और कार सेवा की वजह से सांप्रदायिक तनाव पैदा हुआ था। इसके बाद 1993 में सांप्रदायिक दंगे हुए। वहीं इस बार कोर्स में बताया गया है कि बीजेपी ने अयोध्या की घटनाओं को लेकर दुख व्यक्त किया।
एनसीईआरटी के नए टेक्सट बुक में सुप्रीम कोर्ट के राम मंदिर को लेकर दिए गए फैसले को भी शामिल किया गया है। इसमें बताया गया कि 9 नवंबर 2019 को कोर्ट की संवैधानिक बेंच ने ने इस संबंध में अहम फैसला दिया जिससे राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हुआ। पुरानी किताब में अखबार की कटिंग और तस्वीर लगाई गई थी। इसमें बाबरी ढहाने के बाद कल्याण सिंह सरकार को हटाने के आदेश का उल्लेख भी हटा दिया गया है।
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