PlayBreaking News

सिकल सेल और थैलेसीमिया जैसी आनुवंशिक बीमारियों से पीड़ित लाखों बच्चों की जिंदगी संवारेगी जीन थेरेपी

केंद्र सरकार के बड़े प्रोजेक्ट में जबलपुर मेडिकल कॉलेज भी शामिल, प्री क्लिनिकल ट्रायल के लिए कलेक्ट किए जा सैंपल
Follow on Google News
सिकल सेल और थैलेसीमिया जैसी आनुवंशिक बीमारियों से पीड़ित लाखों बच्चों की जिंदगी संवारेगी जीन थेरेपी

हर्षित चौरसिया

जबलपुर। सिकल सेल और थैलेसीमिया जैसी आनुवंशिक बीमारियों के इलाज के लिए बोन मैरो ट्रांसप्लांट से एक कदम आगे जीन थैरेपी की शुरुआत होने जा रही है। इससे उन पीड़ित बच्चों को राहत मिलेगी, जो जेनेटिक बीमारियों के उपचार के लिए डोनर के इंतजार में होते हैं। नेशनल जीन थैरेपी प्रोग्राम के तहत केंद्र ने जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज को भी एक प्रमुख केंद्र के रूप में चुना गया है। फिलहाल प्री क्लिनिकल ट्रायल के तहत उन पीड़ित बच्चों को चिह्नित किया जा रहा है, जिन्हें सबसे ज्यादा जरूरत है। इनके सैंपल कलेक्शन कर लैब भेजे जाने की तैयारी चल रही है। मेडिकल कॉलेज की बोन मैरो ट्रांसप्लांट प्रभारी डॉ. श्वेता पाठक ने बताया कि कॉलेज को जीन थैरेपी के लिए चल रहे काम के लिए चुना गया है। इस थैरेपी के लिए क्लिनिकल ट्रायल 3 तीन चरणों में होगी। इसमें प्री क्लिनिकल, क्लिनिकल और फाइनल स्टेप होता है। विदेशों में इसके लिए 7 से 8 करोड़ रुपए तक खर्च होते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत में इस थैरेपी के शुरू होने में करीब एक साल लग सकता है।

ये भी पढ़ें: मध्य प्रदेश देश का दूसरा राज्य, जहां 57 हजार करोड़ रुपए से चल रहा 83 नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स पर काम

प्रदेश में सिकल सेल मरीज

-1.15 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग हुई

-31 हजार सिकल सेल के मरीज चिह्नित

-2.14 लाख वाहक मिले 

ये भी पढ़ें: अडाणी समूह ने वित्तीय रणनीति में किया बड़ा बदलाव, कम ब्याज दर की वजह से घरेलू बैंकों पर बढ़ाई निर्भरता

क्या है जीन थैरेपी

डॉ. श्वेता पाठक के मुताबिक, जीन थैरेपी में रोगी को डोनर की जरूरत नहीं होती है। रोगी का ब्लड सैंपल लिया जाता है। हाईटेक लैब में जेनेटिक इंजीनियरिंग का प्रयोग कर इस ब्लड के खराब जीन को रिपेयर किया जाता है। जीन को रिपेयर किए जाने के बाद वापस इसे मरीज के शरीर में डाला जाता है।

केंद्र सरकार ने की बड़ी पहल

केंद्र सरकार ने इन असाध्य बीमारियों का स्थायी इलाज खोजने के लिए जीन थैरेपी शुरू करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। इसके एक केंद्र के रूप में जबलपुर मेडिकल कॉलेज को भी चुना गया है।

प्रो.(डॉ.) नवनीत सक्सेना डीन मेडिकल कॉलेज जबलपुर। 

ये भी पढ़ें: सैन्य नगरी महू में आज आयोजित होगा संयुक्त रण-संवाद, हिस्सा लेंगे रक्षामंत्री, सीडीएस, वायु और नौसेना प्रमुख

भारत में जीन थैरेपी

-भारत में जीन थैरेपी सीधे अस्पतालों में रुटीन ट्रीटमेंट के रूप में उपलब्ध नहीं है।

-सीएसआईआर, आईजीआईबी जीन एडिटिंग पर रिसर्च कर रहा है।

-आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी कानपुर और आईआईएससी बेंगलुरु डिलीवरी सिस्टम और जीन एडिटिंग टेक्नोलॉजी डेवलप कर रहे हैं।

-एम्स और अपोलो अस्पताल रेअर जैनेटिक डिसीज के लिए क्लीनिकल रिसर्च कर रहे हैं।

Aniruddh Singh
By Aniruddh Singh

अनिरुद्ध प्रताप सिंह। नवंबर 2024 से पीपुल्स समाचार में मुख्य उप संपादक के रूप में कार्यरत। दैनिक जाग...Read More

नई दिल्ली
--°
बारिश: -- mmह्यूमिडिटी: --%हवा: --
Source:AccuWeather
icon

Latest Posts