इंदौर। सीएम डॉ. मोहन यादव ने इंदौर को नर्मदा के चौथे चरण की सौगात दी है। दशहरा मैदान में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने इसका भूमिपूजन किया। इस दौरान शहर के सभी विधायक कार्यक्रम में मौजूद रहे। इस चरण के बाद इंदौर में करीब ढाई लाख नए नर्मदा कनेक्शन हो सकेंगे। इस दौरान मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि “कल्पना कीजिए, यदि नर्मदा का पानी इंदौर तक नहीं पहुंचता तो शहर का क्या होता? आज हम जो कुछ भी हैं, वह मां नर्मदा की कृपा से ही संभव हुआ है।” यह बात एक जनसभा को संबोधित करते हुए वरिष्ठ जनप्रतिनिधि ने कही। उन्होंने उपस्थित नागरिकों से दोनों हाथ उठाकर “नर्मदा मैया की जय” के जयकारे लगाने का आह्वान भी किया।
मध्य प्रदेश के इतिहास में पानी को लेकर इतना बड़ा कार्य
मंच से प्रदेश के मुख्यमंत्री, महापौर, सांसद, विधायक और नगर निगम के पार्षदों का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि नगर निगम द्वारा किए जा रहे कार्यों का प्रभाव सीधे जनता तक पहुंचता है—चाहे वह अच्छा हो या बुरा। अपने 50 वर्षों के राजनीतिक अनुभव का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश के इतिहास में पानी को लेकर इतना बड़ा और व्यापक कार्य पहले कभी नहीं हुआ, जितना आज इंदौर में हो रहा है।
2040 तक इंदौर की जनसंख्या लगभग 65 लाख
उन्होंने महापौर और उनकी टीम की सराहना करते हुए कहा कि शहर में जल प्रबंधन को लेकर जो योजनाएं बनाई गई हैं, वे आने वाले वर्षों में मील का पत्थर साबित होंगी। वर्ष 2040 तक इंदौर की जनसंख्या लगभग 65 लाख तक पहुंचने का अनुमान है, ऐसे में अभी से जल आपूर्ति की दीर्घकालिक योजना बनाना नगर निगम की दूरदृष्टि को दर्शाता है।
500 मीटर ऊंचाई तक पानी लाने को असंभव
अपने संबोधन में उन्होंने नर्मदा परियोजना के इतिहास को याद करते हुए बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समय नर्मदा के प्रथम चरण का शुभारंभ हुआ था। उस समय वैज्ञानिकों ने 500 मीटर ऊंचाई तक पानी लाने को असंभव बताया था, लेकिन इंजीनियरों और विशेषज्ञों की मेहनत से यह चुनौती सफलतापूर्वक पूरी की गई। यह देश की पहली ऐसी पेयजल योजना बनी, जिसमें 500 मीटर लिफ्ट कर पानी पहुंचाया गया।
नर्मदा मैया का जल हमारे लिए अमूल्य
उन्होंने कहा कि इंदौर का पानी देश में सबसे महंगा है, इसलिए प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह पानी की एक-एक बूंद का सम्मान करे और उसे व्यर्थ न बहाए। “नर्मदा मैया का जल हमारे लिए अमूल्य है। यदि हम इसका सम्मान नहीं करेंगे, तो इसके दुष्परिणाम भी गंभीर हो सकते हैं,” उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा।
अंत में उन्होंने मुख्यमंत्री और महापौर सहित सभी जनप्रतिनिधियों का आभार व्यक्त करते हुए नागरिकों से जल संरक्षण का संकल्प लेने की अपील की। “आज का दिन इंदौर के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज होगा,” उन्होंने कहा और अपने संबोधन का समापन “भारत माता की जय” के साथ किया।