Narmada Water Agreement :कांग्रेस ने कहा-यह मध्यप्रदेश के हितों से समझौता, विधानसभा में श्वेत पत्र जारी करे सरकार

भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया है कि नर्मदा जल विवाद और सरदार सरोवर बांध से जुड़े हालिया समझौते में प्रदेश के हितों की अनदेखी की गई है। उन्होंने इस मामले में श्वेत पत्र जारी करने और विधानसभा में विस्तृत चर्चा कराने की मांग की है। पटवारी ने गुरुवार को संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि केंद्रीय नेतृत्व के दबाव में राज्य सरकार ने मध्यप्रदेश के वैधानिक अधिकारों और किसानों के हितों से समझौता किया है।
मप्र को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा
पटवारी ने कहा कि नर्मदा नदी पर मध्यप्रदेश का सर्वाधिक अधिकार होने के बावजूद प्रदेश को सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने दावा किया कि सरदार सरोवर परियोजना से प्रभावित 230 गांवों में से 178 गांव मध्यप्रदेश के हैं तथा सर्वाधिक कृषि भूमि, वन क्षेत्र और आदिवासी परिवारों का विस्थापन भी प्रदेश में हुआ है। उनके अनुसार पूर्व में राज्य सरकार ने परियोजना से संबंधित नुकसान के एवज में गुजरात सरकार से लगभग 7,669 करोड़ रुपए का दावा किया था, लेकिन वर्तमान सरकार ने उसे वापस ले लिया।
ये भी पढ़ें: Indore News : इंदौर-देवास रोड पर चलती बस में लगी भीषण आग, मची अफरा-तफरी
पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि इसके विपरीत राज्य सरकार ने गुजरात को लगभग 550 करोड़ रुपए देने पर सहमति जताई है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा इस समझौते को प्रदेश के हित में बताया जा रहा है, लेकिन इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए। पटवारी ने राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार, बढ़ते कर्ज और विकास के लिए स्पष्ट दृष्टि के अभाव का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश पर 5.61 लाख करोड़ रुपए से अधिक का कर्ज है।
नर्मदा समझौते के मुद्दे पर आंदोलन जारी रहेगा
उन्होंने शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, कृषि और उद्योग सहित विभिन्न क्षेत्रों में सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। साथ ही आरोप लगाया कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक है और महिलाओं, आदिवासियों तथा युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार विफल रही है। पटवारी ने कहा कि कांग्रेस सरकार के कथित भ्रष्टाचार और नर्मदा समझौते के मुद्दे पर आंदोलन जारी रखेगी। उन्होंने घोषणा की कि 15 जुलाई को मुख्यमंत्री निवास का घेराव किया जाएगा।
ये भी पढ़ें: सिंहस्थ 2028 की बड़ी तैयारी: उज्जैन के साथ 7 जिलों के धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर खर्च होंगे 3,778 करोड़ रुपए












