मानसून की धीमी रफ्तार से किसान परेशान!इन फसलों का हुआ बुरा हाल, चाय बगान भी चपेट में

जिन क्षेत्रों में नहर या ट्यूबवेल जैसी सिंचाई सुविधाएं सीमित हैं, वहां स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। ऐसे इलाकों में किसान पूरी तरह मानसून पर निर्भर रहते हैं।
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इन फसलों का हुआ बुरा हाल, चाय बगान भी चपेट में

देश के कई हिस्सों में इस बार Monsoon की धीमी रफ्तार ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। हर साल बारिश का मौसम खेती के लिए नई उम्मीद लेकर आता है, लेकिन इस बार समय पर पर्याप्त बारिश नहीं होने से खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हुई है। खेतों में नमी की कमी के कारण कई किसानों को बुवाई टालनी पड़ी, जबकि जिन किसानों ने शुरुआती बारिश के भरोसे बीज बो दिए थे, उन्हें अब दोबारा बुवाई की आशंका सता रही है। इससे खेती की लागत भी बढ़ने लगी है।

किस खेती पर कितना असर पड़ा

Monsoon में देरी का सबसे ज्यादा असर धान, सोयाबीन और मक्का जैसी खरीफ फसलों पर देखने को मिल रहा है। धान की रोपाई कई इलाकों में तय समय से पीछे चल रही है, क्योंकि खेतों में पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पाया है। वहीं सोयाबीन और मक्का की फसल भी प्रभावित हुई है। कई किसानों को दोबारा बीज खरीदने और बुवाई कराने की तैयारी करनी पड़ रही है। इससे बीज, मजदूरी और सिंचाई का खर्च बढ़ गया है, जिससे किसानों पर आर्थिक दबाव भी बढ़ रहा है।

नहर ट्यूबवेल जैसे इलाकों में ज्यादा चुनौतीपूर्ण हालत

जिन क्षेत्रों में नहर या ट्यूबवेल जैसी सिंचाई सुविधाएं सीमित हैं, वहां स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। ऐसे इलाकों में किसान पूरी तरह मानसून पर निर्भर रहते हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं होती है तो फसलों की वृद्धि, गुणवत्ता और उत्पादन पर बड़ा असर पड़ सकता है। ऐसे में किसानों को खेतों की नियमित निगरानी करनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर कम पानी में तैयार होने वाली फसलों का विकल्प भी अपनाना चाहिए।

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मानसून की देरी से किन फसलों पर कितना असर?

  1. धान: सबसे ज्यादा प्रभावित फसल। समय पर रोपाई नहीं होने से उत्पादन घटने का खतरा बढ़ा है।
  2. सोयाबीन: नमी की कमी के कारण बुवाई प्रभावित हुई। कई किसानों को दोबारा बुवाई करनी पड़ सकती है।
  3. मक्का: पर्याप्त बारिश नहीं मिलने से अंकुरण और शुरुआती बढ़वार पर असर पड़ा है।
  4. दालें (अरहर, उड़द, मूंग): जिन इलाकों में बारिश कम हुई, वहां बुवाई में देरी हुई है।
  5. कपास: शुरुआती वृद्धि के लिए जरूरी नमी नहीं मिलने से पौधों का विकास धीमा हो सकता है।
  6. गन्ना: सिंचाई वाले क्षेत्रों में असर कम, लेकिन वर्षा पर निर्भर इलाकों में बढ़वार प्रभावित हो सकती है।
  7. चाय बागान: नई पत्तियों की ग्रोथ धीमी हुई, उत्पादन और गुणवत्ता दोनों पर असर पड़ रहा है।
  8. सब्जियां: बारिश की कमी से सिंचाई लागत बढ़ी और कई जगह फसलों की बढ़वार धीमी हो गई।

चाय उद्योग भी बुरी तरह चपेट में

मानसून की देरी का असर सिर्फ अनाज और तिलहन फसलों तक सीमित नहीं है, बल्कि चाय उद्योग भी इससे प्रभावित हो रहा है। चाय की नई पत्तियों की अच्छी बढ़वार के लिए नियमित बारिश और अनुकूल तापमान बेहद जरूरी होता है। इस बार मौसम में असंतुलन के कारण कई चाय उत्पादक क्षेत्रों में पौधों की वृद्धि धीमी हो गई है। इसके चलते चाय की पत्तियों की गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है और उत्पादन में भी गिरावट दर्ज की जा रही है।

जल्द हालत सामान्य नहीं हुए तो क्या- क्या होगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही सामान्य बारिश नहीं हुई तो आने वाले हफ्तों में चाय उत्पादन और अधिक प्रभावित हो सकता है। उत्पादन कम होने की स्थिति में बाजार में चाय की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। फिलहाल किसान और चाय बागान संचालक दोनों की नजर मौसम पर टिकी हुई है। अच्छी और नियमित बारिश ही फसलों को नुकसान से बचाने के साथ-साथ चाय उत्पादन को भी सामान्य स्थिति में ला सकती है।

Aakash Waghmare
By Aakash Waghmare

आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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