कांग्रेस में बढ़ी अंदरूनी नाराजगी?वरिष्ठ नेता नरेश ज्ञानचंदानी ने दिया इस्तीफा, 37 साल बाद पार्टी छोड़ने की बताई वजह

भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस को उस समय बड़ा झटका लगा जब भोपाल की हुजूर विधानसभा सीट से कांग्रेस के पूर्व प्रत्याशी नरेश ज्ञानचंदानी ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी को पत्र लिखकर अपना इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार करने की मांग की है।
7 जून 2026 को लिखे गए इस्तीफा पत्र में नरेश ज्ञानचंदानी ने कहा कि, उन्होंने केवल अपनी बात राहुल गांधी तक पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक ट्वीट किया था। उनका कहना है कि, उन्होंने किसी मीडिया संस्थान को बयान नहीं दिया और न ही सोशल मीडिया पर कोई वीडियो या सार्वजनिक बयान जारी किया।
क्यों दिया इस्तीफा?
अपने पत्र में नरेश ज्ञानचंदानी ने लिखा कि, वे समय-समय पर पार्टी हित में राहुल गांधी को ट्वीट करते रहे हैं। लेकिन इस बार एक ट्वीट को लेकर जिस तरह की प्रतिक्रिया मिली, उससे वे आहत हैं। उन्होंने कहा कि, 37 सालों तक पार्टी की ईमानदारी से सेवा करने के बावजूद राहुल गांधी को अपनी बात बताना प्रदेश नेतृत्व को स्वीकार नहीं हुआ। इसी वजह से उन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला किया।
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5 जून के ट्वीट के बाद बढ़ा विवाद
नरेश ज्ञानचंदानी ने अपने इस्तीफे में जिस ट्वीट का जिक्र किया है, वह उन्होंने 5 जून को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को टैग करते हुए किया था। ट्वीट में उन्होंने मध्य प्रदेश में 2028 के विधानसभा चुनाव का हवाला देते हुए राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन पर अपनी राय रखी थी।
ज्ञानचंदानी ने लिखा था, ‘आदरणीय राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, आपको पता है कि मध्य प्रदेश में 2028 में विधानसभा चुनाव है और इस समय राज्यसभा में ऐसे व्यक्ति को भेजना था जिसकी जमीन पर पकड़ हो और जो विधानसभा चुनाव जिता पाए। लेकिन आप बड़ी गलती करने जा रहे हैं। श्री दिग्विजय सिंह के अलावा कोई चुनाव नहीं जिता सकता।’
उनका दावा है कि यह ट्वीट उन्होंने पार्टी हित में और अपनी बात सीधे शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचाने के लिए किया था। इस्तीफा पत्र में भी उन्होंने स्पष्ट किया है कि उन्होंने इस मुद्दे पर किसी मीडिया संस्थान को बयान नहीं दिया और न ही सोशल मीडिया पर कोई वीडियो जारी किया। उनके अनुसार, केवल एक ट्वीट को लेकर जिस तरह की प्रतिक्रिया मिली, उससे वे आहत हुए और पार्टी छोड़ने का फैसला किया।
मोतीलाल वोरा का भी किया जिक्र
ज्ञानचंदानी ने अपने राजनीतिक सफर का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि, साल 1989 में तत्कालीन वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय मोतीलाल वोरा उन्हें राजनीति में लेकर आए थे। उस समय उनकी उम्र 24 वर्ष थी। उन्होंने लिखा कि, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के विभाजन के बाद मोतीलाल वोरा ने ही उनका परिचय तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से कराया था। राजनीतिक जीवन में उन्हें दिग्विजय सिंह के अनुभवों से काफी सीखने का अवसर मिला।
कमलनाथ और दिग्विजय सिंह का किया उल्लेख
पत्र में उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि, दोनों वरिष्ठ नेताओं के साथ काम करते हुए उन्हें संगठन और राजनीति को समझने का अवसर मिला। ज्ञानचंदानी ने लिखा कि क्षेत्र में हुए कई बड़े कार्यों के पीछे इन नेताओं के मार्गदर्शन की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

2018 चुनाव का भी किया जिक्र
पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी ने कहा कि वर्ष 2018 में जब कांग्रेस ने उन्हें टिकट दिया था, तब प्रदेश का सिंधी समाज बड़ी संख्या में कांग्रेस के साथ आया था। उनका दावा है कि, सिंधी समाज परंपरागत रूप से भाजपा का वोट बैंक माना जाता रहा है, लेकिन उस चुनाव में पहली बार कांग्रेस को समाज का व्यापक समर्थन मिला, जिससे कई सीटों पर पार्टी को फायदा हुआ।
कभी पद या टिकट नहीं मांगा
नरेश ज्ञानचंदानी ने अपने पत्र में लिखा कि, उन्होंने कभी पार्टी से पद या टिकट की मांग नहीं की। वे हमेशा संगठन और पार्टी की सेवा में लगे रहे। उन्होंने कहा कि, उन्होंने पार्टी के प्रति निष्ठा और अनुशासन बनाए रखा, चाहे उन्हें कोई पद मिला हो या नहीं।
उन्होंने अपने इस्तीफे की प्रति कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी, पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और दिग्विजय सिंह को भी भेजी है।

राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज
नरेश ज्ञानचंदानी का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब कांग्रेस मध्य प्रदेश में संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। 37 वर्षों तक पार्टी से जुड़े रहे नेता के इस्तीफे को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि अभी तक प्रदेश कांग्रेस की ओर से इस इस्तीफे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर कांग्रेस के भीतर चर्चा और तेज हो सकती है।











