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पाकिस्तान के 9 जगहों के बदले गए नाम :क्यों लिया गया ये फैसला, जानें पूरी वजह...

पाकिस्तान में कट्टरपंथी संगठन तहरीक ए लब्बैक पाकिस्तान अक्सर ऐसे मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन करते रहे हैं, लेकिन इस बार कोई बड़ा आंदोलन देखने को नहीं मिला। जानकारों के मुताबिक मरियम सरकार ने टीएलपी पर सख्ती दिखाई हुई है।
क्यों लिया गया ये फैसला, जानें पूरी वजह...

लाहौर। पाकिस्तान लाहौर में दशकों बाद एक बड़ा सांस्कृतिक बदलाव देखने को मिल रहा है। पाकिस्तान का यह ऐतिहासिक शहर अब धीरे-धीरे अपने पुराने नामों और विरासत की तरफ लौटता दिखाई दे रहा है। पिछले दो महीनों में शहर की 9 जगहों के इस्लामी नाम हटाकर फिर से पुराने हिंदू या ब्रिटिश दौर के नाम बहाल किए गए हैं। सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि इस बदलाव के खिलाफ अब तक किसी बड़े कट्टरपंथी संगठन ने विरोध नहीं किया है।

कृष्णनगर और जैन मंदिर चौक की वापसी

लाहौर का इस्लामपुरा इलाका अब आधिकारिक तौर पर फिर से कृष्णनगर कहलाएगा। वहीं बाबरी मस्जिद चौक का नाम बदलकर पुराने जैन मंदिर चौक के नाम पर कर दिया गया है। नए बोर्ड भी लगा दिए गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे पहले से ही इन इलाकों को पुराने नामों से बुलाते रहे हैं। कई लोगों के लिए ये सिर्फ नाम नहीं, बल्कि शहर की पहचान और इतिहास का हिस्सा हैं।

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लक्ष्मी चौक हमारी विरासत है

बिकनहाउस यूनिवर्सिटी के लेक्चरर साद मलिक कहते हैं कि लक्ष्मी चौक का नाम बदलना कभी लोगों के दिलों में स्वीकार नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि सरकारी कागजों में भले इसका नाम मौलाना जफर अली चौक कर दिया गया था, लेकिन आम लोग आज भी इसे लक्ष्मी चौक ही कहते हैं। उनके मुताबिक यह नाम पीढ़ियों की यादों और शहर की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा हुआ है।

मरियम नवाज सरकार का बड़ा कदम

मरयम नवाज सरकार ने मार्च में लाहौर हेरिटेज एरिया रिवाइवल प्रोजेक्ट शुरू किया था। इसी के तहत पुराने ऐतिहासिक नाम बहाल करने का फैसला लिया गया। पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने कहा कि यूरोपीय देश अपने इतिहास और पुराने नामों को संभालकर रखते हैं। लाहौर के नाम भी उसकी पहचान हैं और उन्हें मिटाना नहीं चाहिए। मरियम नवाज ने भी कहा कि शहर का इतिहास ही उसकी असली पहचान है और पुराने नाम उसी इतिहास का हिस्सा हैं।

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कट्टरपंथियों ने क्यों नहीं किया विरोध?

पाकिस्तान में कट्टरपंथी संगठन तहरीक ए लब्बैक पाकिस्तान अक्सर ऐसे मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन करते रहे हैं, लेकिन इस बार कोई बड़ा आंदोलन देखने को नहीं मिला। जानकारों के मुताबिक मरियम सरकार ने टीएलपी पर सख्ती दिखाई हुई है। यही वजह है कि विरोध सामने नहीं आया। वहीं कुछ मुस्लिम धर्मगुरुओं ने भी कहा कि पुराने हिंदू या जैन नाम रखने से इस्लाम को कोई खतरा नहीं है।

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बाबरी विवाद के बाद बदले गए थे नाम

लाहौर में नाम बदलने का दौर 1990 के दशक में शुरू हुआ था। भारत में बाबरी मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद पाकिस्तान में कई जगहों के हिंदू और पुराने नाम बदल दिए गए थे। अब करीब तीन दशक बाद पाकिस्तान में फिर से पुराने नाम बहाल किए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक अगले चरण में सिंध और खैबर पख्तूनख्वाह प्रांतों में भी ऐसे बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

Aakash Waghmare
By Aakash Waghmare

आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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