17 या 18 अगस्त... कब है नाग पंचमी? दूर करें कंफ्यूजन, जानें शुभ मुहूर्त और महत्व

हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव की पूजा के लिए बेहद खास माना जाता है। इसी महीने में नाग पंचमी का पर्व भी श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। सावन शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग देवता की पूजा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता है कि नाग पंचमी के दिन विधि-विधान से नाग देवता की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और जीवन की कई परेशानियां दूर होती हैं। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं और नाग पंचमी की व्रत कथा का पाठ या श्रवण भी करते हैं।
कब मनाई जाएगी नाग पंचमी?
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस साल नाग पंचमी का पर्व 17 अगस्त 2026, सोमवार को मनाया जाएगा। वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 16 अगस्त को शाम 4:52 बजे शुरू होगी और 17 अगस्त को शाम 5 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार नाग पंचमी का पर्व 17 अगस्त को मनाना शुभ रहेगा।
नाग पञ्चमी पूजा मुहूर्त - 05:51 ए एम से 08:29 ए एम
अवधि - 02 घण्टे 37 मिनट्स
नाग पंचमी की पूजा विधि
नाग पंचमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद घर में किसी साफ स्थान पर चौकी लगाकर उस पर नाग देवता का चित्र या मिट्टी से बनी सर्प प्रतिमा स्थापित करें।
इसके बाद नाग देवता को हल्दी, रोली, अक्षत, फूल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें। दूध, घी और चीनी का मिश्रण भी श्रद्धा के साथ चढ़ाया जाता है।
पूजा के दौरान नाग देवता का ध्यान करें और नाग पंचमी व्रत कथा का पाठ या श्रवण करें। अंत में नाग देवता की आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।
जानें शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त - 04:24 ए एम से 05:08 ए एम
प्रातः सन्ध्या - 04:46 ए एम से 05:51 ए एम
अभिजित मुहूर्त - 11:59 ए एम से 12:51 पी एम
विजय मुहूर्त - 02:36 पी एम से 03:29 पी एम
गोधूलि मुहूर्त - 06:59 पी एम से 07:20 पी एम
सायाह्न सन्ध्या - 06:59 पी एम से 08:04 पी एम
अमृत काल - 10:16 पी एम से 11:57 पी एम
निशिता मुहूर्त - 12:03 ए एम, अगस्त 18 से 12:47 ए एम, अगस्त 18
रवि योग - 05:51 ए एम से 08:04 ए एम
नाग पंचमी को लेकर क्या है मान्यता?
धार्मिक ग्रंथों में नाग पंचमी से जुड़ी कई कथाओं और मान्यताओं का उल्लेख मिलता है। भविष्य पुराण के ब्रह्म पर्व में नाग पंचमी की कथा का वर्णन बताया गया है। इसमें सुमंतु मुनि ने राजा शतानीक को नाग पंचमी की कथा सुनाई थी। मान्यता है कि श्रावण शुक्ल पंचमी के दिन नाग लोक में विशेष उत्सव होता है। इस दिन नाग देवता की पूजा करने और उन्हें दूध से स्नान कराने से नागों की कृपा प्राप्त होती है और परिवार को सर्प भय से सुरक्षा मिलती है।
आस्तिक मुनि ने नागों को बचाया था
नाग पंचमी से जुड़ी एक कथा महाभारत में राजा जन्मेजय के नाग यज्ञ से भी जुड़ी है। कथा के अनुसार, राजा जन्मेजय ने नागों का विनाश करने के लिए यज्ञ शुरू किया था। यज्ञ में बड़े-बड़े नाग आकर अग्नि में गिरने लगे। इसी दौरान आस्तिक नामक ब्राह्मण ने यज्ञ को रोक दिया और नागों की रक्षा की। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह घटना पंचमी तिथि को हुई थी। इसी वजह से नाग पंचमी के पर्व का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।
नाग पंचमी पर रखें आस्था और सावधानी
नाग पंचमी का पर्व नाग देवता के प्रति श्रद्धा और प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश भी देता है। पूजा-पाठ करते समय धार्मिक परंपराओं का पालन करें और जीवित सांपों को दूध पिलाने या उनके साथ किसी तरह का जोखिम लेने से बचें। नाग देवता की पूजा प्रतीकात्मक रूप से करना अधिक सुरक्षित है।











