कर्नाटक की मशहूर मैसूर सिल्क साड़ी खरीदने के लिए बेंगलुरु की महिलाओं में जबरदस्त क्रेज देखा जा रहा है। महिलाएं सुबह 4 बजे से ही शोरूम के बाहर कतार में खड़े हो जाती हैं। यह नजारा किसी iPhone लॉन्च की भीड़ जैसा लग रहा है। सोशल मीडिया पर इस दीवानगी की तुलना iPhone के हंगामे से की जा रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, इन साड़ियों की कीमत 20-25 हजार रुपए से शुरू होकर 2.5 लाख रुपए तक जाती है। इतनी महंगी होने के बावजूद इनकी मांग कम नहीं हो रही। शोरूम में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए टोकन सिस्टम लागू किया गया है और एक व्यक्ति को सिर्फ एक साड़ी खरीदने की अनुमति है। इसी वजह से लोग देर रात या सुबह जल्दी आकर लाइन में लग जाते हैं।
मैसूर सिल्क साड़ियां कर्नाटक सिल्क इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन (KSIC) बनाती है और इन्हें GI टैग भी मिला हुआ है। इनकी मांग अधिक है, लेकिन सप्लाई सीमित है। इन्हें बनाने में समय लगता है क्योंकि इसमें कुशल कारीगर और शुद्ध रेशम इस्तेमाल होता है। एक साड़ी बनने में कई दिन लगते हैं। शादी और त्योहारों के सीजन में मांग और भी बढ़ जाती है।
सोशल मीडिया पर लोग इस दीवानगी को iPhone खरीदने की भीड़ से जोड़कर देख रहे हैं। वहीं कई लोग इसे भारतीय परंपरा और पारंपरिक पहनावे के प्रति बढ़ते सम्मान का संकेत मान रहे हैं। उनका कहना है कि मैसूर सिल्क साड़ी सिर्फ कपड़ा नहीं, बल्कि शान और संस्कृति की पहचान है। इसी वजह से महंगी होने के बावजूद इसकी मांग बढ़ती जा रही है।
मैसूर सिल्क साड़ी कर्नाटक में बनता है और यह एक खास, महंगा रेशमी कपड़ा है। यह अपनी शुद्धता, चमकदार बनावट, हल्के वजन और प्राकृतिक चमक के लिए प्रसिद्ध है। इसे 100% शहतूत रेशम और असली सोने-चांदी की जरी से बनाया जाता है। इस वजह से यह शादियों और त्योहारों में शाही और पारंपरिक परिधान माना जाता है।