Peoples Update Special :AI से होगी मुंह के कैंसर की शुरुआती पहचान, GMC का मुख आरोग्य ऐप बना उम्मीद

गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल का AI आधारित 'मुख आरोग्य' ऐप गांवों तक ओरल कैंसर की शुरुआती पहचान में मदद करेगा। विशेषज्ञों के अनुसार समय पर जांच से 80-90% मरीजों का सफल इलाज संभव है।
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AI से होगी मुंह के कैंसर की शुरुआती पहचान, GMC का मुख आरोग्य ऐप बना उम्मीद
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प्रवीण श्रीवास्तव, भोपाल। मुंह में होने वाला एक छोटा-सा छाला, बार-बार होने वाला घाव या दांत से लगी मामूली चोट कई बार ओरल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का शुरुआती संकेत हो सकती है। लेकिन जागरूकता की कमी और समय पर जांच न होने के कारण अधिकांश मरीज तब अस्पताल पहुंचते हैं, जब बीमारी एडवांस स्टेज में पहुंच चुकी होती है। ऐसे मामलों में इलाज कठिन होने के साथ मरीज की जान का खतरा भी बढ़ जाता है। इसी चुनौती से निपटने के लिए गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC), भोपाल ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित 'मुख आरोग्य' ऐप विकसित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तकनीक को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और ग्रामीण क्षेत्रों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया गया तो शुरुआती स्क्रीनिंग आसान होगी, मरीज समय पर विशेषज्ञों तक पहुंच सकेंगे और करीब 80 से 90 प्रतिशत मरीजों का इलाज शुरुआती चरण में ही सफल हो सकेगा।

AI ऐप करता है संदिग्ध लक्षणों की पहचान

मुख आरोग्य मोबाइल एप्लीकेशन मरीज के मुंह के अंदर मौजूद घाव, सफेद या लाल धब्बे, छाले और अन्य संदिग्ध लक्षणों की स्क्रीनिंग करता है। AI तकनीक के माध्यम से यह कैंसर की आशंका का शुरुआती संकेत देता है। इसके साथ ही मरीज को आगे की जांच और उपचार के लिए विशेषज्ञ अस्पताल तक पहुंचाने के लिए रेफरल सिस्टम भी विकसित किया गया है।

मामला-1: दांत का कीड़ा समझकर करते रहे घरेलू इलाज, निकला एडवांस स्टेज का कैंसर

57 वर्षीय कुलवंत राय (परिवर्तित नाम) दांत के पास बने छोटे घाव और दर्द को सामान्य दांत का कीड़ा समझते रहे। कई महीनों तक उन्होंने लौंग का तेल और घरेलू नुस्खों से इलाज किया। जब घाव बढ़ गया और मुंह खोलने में परेशानी होने लगी तो जांच कराई। जांच में पता चला कि उन्हें शुरुआती नहीं बल्कि एडवांस स्टेज का ओरल कैंसर है।

मामला-2: बार-बार होने वाले छाले को नजरअंदाज करना पड़ा भारी

45 वर्षीय राधा बाई (परिवर्तित नाम) गाल के अंदर बार-बार होने वाले छालों को सामान्य घाव मानकर हल्दी, शहद और देसी उपचार करती रहीं। कई महीने बाद जब घाव बड़ा हो गया और खाना खाने में परेशानी बढ़ी, तब डॉक्टर के पास पहुंचीं। जांच में उन्हें ओरल कैंसर होने की पुष्टि हुई जिसके बाद सर्जरी सहित अन्य उपचार की जरूरत पड़ी।

भारत में हर साल सामने आते हैं करीब 1.5 लाख नए मरीज

देश में ओरल कैंसर तेजी से बढ़ती गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुका है। नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2026 तक ओरल कैंसर के मामलों में करीब 12 प्रतिशत बढ़ोतरी की आशंका है। भारत में हर वर्ष लगभग 1.5 लाख नए ओरल कैंसर मरीज सामने आते हैं। भोपाल में पुरुषों में होने वाले सभी कैंसर मामलों में 14.3 प्रतिशत मरीज मुंह के कैंसर से पीड़ित हैं, जो देश में सबसे अधिक माना जा रहा है। वहीं महिलाओं में यह आंकड़ा 4.6 प्रतिशत है। शहर में पुरुषों में कैंसर की वार्षिक वृद्धि दर 0.1 प्रतिशत और महिलाओं में 0.7 प्रतिशत दर्ज की गई है।

शुरुआती जांच से 80 से 90 फीसदी मरीज हो सकते हैं स्वस्थ

एम्स के दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. अंशुल राय का कहना है कि अधिकांश मरीज इलाज के लिए बीमारी की अंतिम अवस्था में पहुंचते हैं। यदि शुरुआती चरण में बीमारी की पहचान हो जाए तो 80 से 90 प्रतिशत मरीज पूरी तरह ठीक हो सकते हैं।

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तंबाकू की आसान उपलब्धता भी बढ़ा रही खतरा

एम्स द्वारा किए गए एक शोध में सामने आया कि भोपाल में औसतन हर 17 मीटर पर तंबाकू की एक दुकान मौजूद है। शहर में एक किलोमीटर के दायरे में 32 से 102 दुकानें मिलीं जबकि औसतन 59 दुकानें प्रति किलोमीटर तंबाकू बेच रही हैं। इसके विपरीत न्यूयॉर्क में 10 किलोमीटर के क्षेत्र में केवल 4 तंबाकू की दुकानें होने का उल्लेख शोध में किया गया है।

विशेषज्ञों की राय

डॉ. स्वप्निल परलानी, विभागाध्यक्ष, प्रोस्थो डिपार्टमेंट, पीसीडीएस ने कहा कि उन्होंने भी इस ऐप के बारे में जानकारी प्राप्त की है। उनके अनुसार इससे जागरूकता बढ़ेगी और सरकार के पास स्क्रीनिंग का बड़ा डेटा तैयार होगा। ग्रामीण स्तर पर जांच होने से मरीजों की पहचान शुरुआती अवस्था में हो सकेगी।

डॉ. गरिमा भम्बलानी, प्रोफेसर, डेंटल डिपार्टमेंट, पीसीडीएस का कहना है कि इलाज से बेहतर बचाव होता है। यदि इस तरह की तकनीक का सही उपयोग किया जाए और इसे ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाया जाए तो बीमारी को शुरुआती चरण में ही रोका जा सकता है।

डॉ. अनुज भार्गव, विभागाध्यक्ष, डेंटिस्ट्री विभाग, हमीदिया अस्पताल ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों से अधिकांश मरीज कैंसर की अंतिम अवस्था में अस्पताल पहुंचते हैं। इसी वजह से यह विचार आया कि यदि जांच को आसान बनाया जाए तो बीमारी को शुरुआती स्टेज पर ही पकड़ा जा सकेगा और समय रहते इलाज संभव होगा।

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मध्य प्रदेश में ओरल कैंसर की स्थिति

  • पुरुषों में मुख कैंसर के मरीज: 7,370
  • पुरुषों में जीभ के कैंसर के मरीज: 4,094
  • महिलाओं में मुख कैंसर के मरीज: 2,264
Sumit Shrivastava
By Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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