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मढ़ई में बढ़ता पर्यटन बना वन्यजीवों के लिए खतरा, तेज रोशनी और खुली जीपों से जंगल में 'सफारी'

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मढ़ई में बढ़ता पर्यटन बना वन्यजीवों के लिए खतरा, तेज रोशनी और खुली जीपों से जंगल में 'सफारी'
सोहागपुर स्थित मढ़ई पर्यटन क्षेत्र में तेजी से विकसित हो रहे रिसोर्ट और होटल्स के चलते वन्य प्राणियों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। पर्यटक जंगल की शांति को भंग करते हुए रात के समय खुली जीपों से तेज सर्च लाइट में वन्य प्राणियों को निहारते हैं और वीडियो बनाते हैं। यह अवैध गतिविधियां अब आम हो चुकी हैं और अक्सर सोशल मीडिया पर इनका प्रदर्शन देखा जा सकता है।

पिछले वर्षों में मारे जा चुके कई वन्य प्राणी

पिछले कुछ वर्षों में मढ़ई क्षेत्र में दो बाघों, एक पैंगोलिन और सांभर सहित कई अन्य वन्य प्राणियों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा, ऐसे दर्जनों मामले हैं जो सामने ही नहीं आ सके हैं। जैसे ही किसी जानवर की उपस्थिति की सूचना मिलती है, रिसोर्ट और होटल संचालक अपने मेहमानों को रात में जीपों में बैठा कर जंगल की ओर ले जाते हैं, जिससे वन्य प्राणियों का नैसर्गिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

बफर जोन में भी पहुंच रहे पर्यटक

पर्यटक बफर जोन जैसे संवेदनशील इलाकों में भी पहुंच रहे हैं, जहां बाघ, तेंदुआ और अन्य शिकारी जानवर विचरण करते हैं। यह न केवल वन्य जीवन के लिए खतरा है बल्कि पर्यटकों की सुरक्षा के लिए भी खतरनाक है। वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरणविदों का कहना है कि यदि इस अनियंत्रित और अव्यवस्थित पर्यटन पर रोक नहीं लगाई गई, तो आने वाले समय में सामान्य वन्य प्राणी भी नजर नहीं आएंगे।

वैध-अवैध मंजूरियों से चल रहा पूरा 'खेल'

स्थानीय लोगों का आरोप है कि यहां पर कई गतिविधियां वैध-अवैध मंजूरियों के सहारे निर्भीकता से चलाई जा रही हैं। प्रशासनिक चूक के कारण पर्यटकों को रोका नहीं जा रहा और न ही इन रिसोर्ट्स पर कोई कठोर कार्रवाई की जा रही है।

शिकार के आरोपी अब भी फरार

इस क्षेत्र में बाघों के शिकार की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। एक बड़ा मामला जे. तमांग नामक शिकार के आरोपी से जुड़ा है, जो इंटरपोल अलर्ट के बावजूद आज तक पकड़ा नहीं जा सका है। अगर चाहें तो मैं इस रिपोर्ट का एक छोटा वीडियो स्क्रिप्ट या सोशल मीडिया पोस्ट भी बना सकती हूं। क्या आप चाहेंगी?
Akriti Tiwary
By Akriti Tiwary
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