कटनी-शहडोल रेत खदान मामला:हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, सरकार के निर्णय को मिली मंजूरी

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कटनी और शहडोल जिलों की रेत खदानों के टेंडर रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले को सही ठहराते हुए दो कंपनियों की याचिकाएं खारिज कर दीं।
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हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, सरकार के निर्णय को मिली मंजूरी
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AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    जबलपुर। मध्य प्रदेश के कटनी और शहडोल जिलों की रेत खदानों के टेंडर रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले को लेकर विवाद अदालत तक पहुंचा। इस मामले में मुंबई की साहाकार ग्लोबल लिमिटेड और होशंगाबाद की धनलक्ष्मी मर्चेन्डाइज ने सरकार के निर्णय को चुनौती दी थी। दोनों कंपनियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर टेंडर रद्द करने के फैसले को गलत बताया।

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    हाईकोर्ट का क्या है फैसला?

    मामले की सुनवाई मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने की, जिसमें चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ शामिल थे। अदालत ने सरकार के फैसले को सही ठहराते हुए साफ कहा कि इस निर्णय में हस्तक्षेप करने की कोई आवश्यकता नहीं है।

    बेंच ने टिप्पणी की कि कम बोली लगाकर कंपनियों द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया से सरकार को नुकसान होने की आशंका थी और सरकार ने समय रहते इस स्थिति को पहचान लिया।

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    राज्य सरकार का क्या है पक्ष?

    राज्य सरकार की ओर से अदालत में बताया गया कि याचिकाकर्ता कंपनियों के व्यवहार से राजस्व को बड़ा नुकसान हो सकता था। पहले इन कंपनियों ने ऊंची बोली लगाकर टेंडर हासिल किए, लेकिन बाद में उन्होंने अपने ठेके छोड़ दिए।

    इसके बाद जब नए टेंडर जारी किए गए, तो उन्हीं कंपनियों ने कम बोली लगाकर फिर से भाग लिया। सरकार के अनुसार, यह एक तरह की रणनीति थी, जिससे राजस्व प्रभावित होता।

    संभावित नुकसान का आंकलन

    मामले की सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि एक केस में लगभग 10 करोड़ रुपए और दूसरे में 20 करोड़ रुपए से अधिक के नुकसान की संभावना थी। इस संभावित वित्तीय नुकसान को देखते हुए स्टेट माइनिंग कॉर्पोरेशन ने टेंडर प्रक्रिया को रद्द करने का निर्णय लिया।
    बोर्ड ने 19 नवंबर 2025 को बैठक कर सभी पहलुओं पर विचार किया और इसके बाद टेंडर रद्द करने का फैसला लिया।

    अदालत की टिप्पणी

    हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि जब सरकार को यह लगता है कि किसी प्रक्रिया से सार्वजनिक धन को नुकसान हो सकता है, तो वह अपनी निविदा प्रक्रिया को रोक या बदल सकती है। अदालत ने यह भी माना कि सरकार का निर्णय पारदर्शिता और जनहित को ध्यान में रखकर लिया गया है। इसलिए कोर्ट ने सरकार के फैसले में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

    दोनों कंपनियों की याचिकाएं खारिज

    डिवीजन बेंच ने दोनों कंपनियों की याचिकाओं को खारिज कर दिया। अदालत ने माना कि कंपनियों के तर्क सरकार के निर्णय को चुनौती देने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।

    हालांकि, अदालत ने याचिकाकर्ता कंपनियों को एक राहत दी है। उन्हें यह स्वतंत्रता दी गई है कि वे भविष्य में जारी होने वाली नई निविदाओं में भाग ले सकती हैं।

    Garima Vishwakarma
    By Garima Vishwakarma

    गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...Read More

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