जबलपुर। एक महत्वपूर्ण फैसले में मप्र उच्च न्यायालय ने कहा है कि गेस्ट फैकल्टी को मातृत्व लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। जस्टिस विशाल धगट की अदालत ने शासकीय तिलक पीजी कॉलेज, कटनी के प्राचार्य द्वारा 16 जून 2023 को जारी उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें डॉ. प्रीति साकेत को मातृत्व अवकाश तो दिया गया था, लेकिन उस अवधि में मानदेय न देने का प्रावधान रखा गया था। हाईकोर्ट के इस फैसले से स्पष्ट हो गया है कि मातृत्व अधिकार किसी भी महिला कर्मचारी के लिए मूल अधिकार हैं, चाहे उसकी नियुक्ति स्थाई हो या अस्थाई।
कटनी के शासकीय पीजी तिलक कॉलेज में गेस्ट फैकल्टी के रूप में कार्यरत डॉ. प्रीति साकेत ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इस आदेश को चुनौती दी थी। उनका कहना था कि उन्हें पहले 2 मई 2023 के आदेश में 6 माह के मातृत्व अवकाश के साथ मानदेय देने की स्वीकृति दी गई थी, जिसे बाद में संशोधित कर बिना वेतन कर दिया गया। याचिकाकर्ता ने इसे कानून के विरुद्ध बताते हुए भेदभाव और उत्पीड़न का आरोप भी लगाया।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता हितेन्द्र गोल्हानी व काजल विश्वकर्मा ने दलीलें रखीं। सुनवाई के बाद दिए फैसले में कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भले ही गेस्ट फैकल्टी का पद अस्थाई और संविदात्मक हो, लेकिन मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 का दायरा व्यापक है और यह सरकारी संस्थानों पर भी लागू होता है। अदालत ने कहा कि यह अधिनियम महिलाओं के स्वास्थ्य और मातृत्व सुरक्षा के लिए एक सामाजिक कल्याण कानून है, जिसे संकीर्ण रूप से नहीं देखा जा सकता। ऐसे में मातृत्व अवकाश के दौरान वेतन से वंचित करना कानून और संवैधानिक भावना के विपरीत है।
इस मत के साथ हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को 26 सप्ताह का मातृत्व अवकाश दिया जाए, जिसमें 8 सप्ताह प्रसव पूर्व और 18 सप्ताह प्रसव के बाद शामिल होंगे। इस अवधि के लिए उन्हें वेतन दिया जाएगा। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस अवधि के बाद की अतिरिक्त छुट्टी को बिना वेतन माना जाएगा।