हाईकोर्ट ने निचली अदालत से पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। 2017 से लंबित इस केस में अब अगली सुनवाई 27 अप्रैल को तय की गई है, जिससे मामले में नई गति आने की उम्मीद है।
यह पूरा मामला वर्ष 2003 के विधानसभा चुनाव के दौरान दिए गए बयानों से संबंधित है। आरोप है कि उमा भारती ने संवाददाताओं से चर्चा में दिग्विजय सिंह पर गंभीर आरोप लगाए थे। इन्हीं आरोपों को आधार बनाकर दिग्विजय सिंह ने मानहानि का केस दायर किया था। यह मामला लंबे समय से कोर्ट में लंबित है और अब फिर सुर्खियों में आ गया है।
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दिग्विजय सिंह ने पहले सीजेएम कोर्ट में मानहानि का मुकदमा दायर किया था। गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद बचाव पक्ष की ओर से साक्ष्य प्रस्तुत किए गए थे। बचाव गवाह नरेन्द्र बिरथरे के पुनः परीक्षण की मांग को 2017 में निचली अदालत ने खारिज कर दिया था। इसके बाद एडीजे कोर्ट से होते हुए यह मामला हाईकोर्ट पहुंचा, जहां अब सुनवाई जारी है।
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मामले की सुनवाई जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान दिग्विजय सिंह की ओर से अधिवक्ता राजीव मिश्रा पेश हुए। कोर्ट ने रजिस्ट्रार को निर्देश दिए कि निचली अदालत से पूरे केस की स्टेटस रिपोर्ट मंगाई जाए। अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होगी, करीब दो दशकों पुराने इस मानहानि मामले में हाईकोर्ट की सक्रियता से एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। आने वाली सुनवाई में यह साफ हो सकेगा कि मामले की दिशा क्या होगी और आगे की कानूनी प्रक्रिया किस तरह बढ़ेगी।