मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव शरद चंद्र बेहार ने अपने प्रशासनिक जीवन के अनुभव साझा करते हुए बताया कि समय के साथ न सिर्फ सिस्टम बदला है बल्कि प्रशासनिक सेवाओं को देखने का नजरिया भी पूरी तरह बदल चुका है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1961 में जब वे मध्यप्रदेश से भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में चयनित हुए थे तब पूरे प्रदेश में कहीं भी इस उपलब्धि की खबर तक नहीं छपी थी। उस समय छत्तीसगढ़ भी मध्यप्रदेश का हिस्सा था लेकिन रायपुर, बिलासपुर, भोपाल या इंदौर जैसे प्रमुख शहरों के किसी भी अखबार में उनके चयन की एक लाइन भी प्रकाशित नहीं हुई। बेहार कहते हैं कि आज के दौर में छोटी-छोटी उपलब्धियों को भी बड़ी जगह मिलती है जबकि उस समय हालात बिल्कुल अलग थे। उन्होंने इसे बदलते समय और समाज की प्राथमिकताओं का संकेत बताया।

पूर्व मुख्य सचिव ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि भोपाल में पहली पोस्टिंग के दौरान वे 1250 अस्पताल क्षेत्र से प्राइवेट बस में बैठकर पुराने भोपाल स्थित कार्यालय पहुंचते थे। उस समय न तो सरकारी गाड़ियों की सुविधा थी और न ही विशेष व्यवस्थाएं। नया मंत्रालय बनने के बाद भी कई साल तक वे अपनी स्कूटी से ही ऑफिस जाया करते थे। उन्होंने बताया कि 1982 के बाद ही अधिकारियों को सरकारी वाहन मिलना शुरू हुआ। बेहार ने कहा कि उस दौर में IAS अधिकारी और आम नागरिक के बीच ज्यादा अंतर महसूस नहीं होता था। वे खुद कई बार बस में खड़े होकर सफर करते थे जो आज के समय में कल्पना करना भी मुश्किल है।
अपने कार्यकाल के दौरान कई अहम जिम्मेदारियां निभाने का जिक्र करते हुए बेहार ने बताया कि 1965 में जब नया मंत्रालय शुरू हुआ तब उन्होंने ही विभागों के कक्ष और अधिकारियों के बैठने की व्यवस्था तय की थी। उस समय वे सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) में अंडर सेक्रेटरी थे। इसके अलावा पंचानन भवन के नामकरण का श्रेय भी उन्होंने खुद को दिया। उन्होंने बताया कि यह नाम भी उन्होंने ही सुझाया था। वहीं नए विधानसभा भवन के उद्घाटन के समय मुख्य सचिव के रूप में उन्हें कार्यक्रम शुरू कराने का अवसर मिला जिसे वे अपने जीवन का महत्वपूर्ण क्षण मानते हैं।
बेहार ने साफ कहा कि उनके समय में प्रशासनिक कार्यों पर राजनीतिक दबाव नहीं होता था। उन्होंने एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने उनसे एक डिग्री कॉलेज के प्रिंसिपल को हटाने के लिए कहा था। लेकिन उन्होंने इस आदेश को मानने से इनकार कर दिया और स्पष्ट किया कि जिस व्यक्ति के नेतृत्व में कॉलेज बेहतर काम कर रहा है उसे केवल विरोध के कारण हटाना सही नहीं होगा। बेहार के अनुसार मुख्यमंत्री ने उनकी बात को स्वीकार किया और कुछ समय बाद जब माहौल शांत हुआ तब दोबारा निर्णय लिया गया।
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पूर्व मुख्य सचिव का मानना है कि आज प्रशासनिक सेवाओं में सुविधाएं तो बढ़ी हैं लेकिन चुनौतियां और दबाव भी उसी अनुपात में बढ़े हैं। उनके अनुभव यह बताते हैं कि पहले के दौर में संसाधन सीमित थे लेकिन निर्णय लेने की स्वतंत्रता और ईमानदारी अधिक थी।