High Court News : सांसद अभिषेक बनर्जी पहुंचे मप्र हाईकोर्ट, मानहानि केस को किया चैलेंज

मंत्री विजयवर्गीय के बेटे आकाश ने गुंडा कहने पर किया था मानहानि केस
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सांसद अभिषेक बनर्जी पहुंचे मप्र हाईकोर्ट, मानहानि केस को किया चैलेंज
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    योगेश सोनी, जबलपुर। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे व तृणमूल कांग्रेस के महासचिव-सांसद अभिषेक बनर्जी मप्र हाईकोर्ट की शरण में पहुंचे।  अभिषेक ने भोपाल की एमपीएएमएलए कोर्ट द्वारा इंदौर के पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय के मानहानि मामले में जारी गिरफ्तारी वारंट को चुनौती दी है। सोमवार को जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की अदालत ने अंतरिम राहत के मुद्दे पर सुनवाई पूरी होने पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। गौरतलब है कि ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक ने 29 नवंबर 2020 को कोलकाता में आयोजित एक सभा में भाजपा के वर्तमान नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश को गुंडा बोला था।  इस भाषण को मीडिया ने काफी उछाला था। अभिषेक के इस बयान को मानहानि की श्रेणी में बताते हुए आकाश विजयवर्गीय ने वर्ष 2021 में एक मामला दाखिल किया था।

    दो बार जारी हुआ गिरफ्तारी वारंट

    उस मामले पर 1 मई 2021 से सुनवाई चल रही थी, लेकिन एक भी पेशी पर अभिषेक बनर्जी हाजिर नहीं हुए। इसे गंभीरता से लेते हुए भोपाल की एमपीएमएलएल कोर्ट के न्यायिक मजिस्ट्रेट तथागत यागनिक ने उसके खिलाफ 11 अगस्त 2025 को गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। नोटिस तामील न होने पर 26 अगस्त को फिर से गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। इसी वारंट को चुनौती देकर यह पुनरीक्षण याचिका हाईकोर्ट में दाखिल की गई है। मामले में सोमवार को हुई प्रारंभिक सुनवाई के दौरान अभिषेक बनर्जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल खरे व अधिवक्ता मनन अग्रवाल हाजिर हुए। गिरफ्तारी वारंट पर रोक के संबंध में उनकी दलीलों को सुनकर अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

    ...तो भाजपा नेताओं को खंभे से बांध देना

    अभिषेक भतीजे अक्सर विवादों में घिरे रहते हैं। हाल ही में उन्होंने एसआईआर को लेकर भी विवादित बयान दिया था। अभिषेक बनर्जी ने लोगों से कहा था कि अगर एसआईआर या एनआरसी सत्यापन के दौरान उनके माता-पिता के जन्म प्रमाण पत्र मांगे जाते हैं, तो स्थानीय भाजपा नेताओं को खंभे से बांध दें। अभिषेक ने यह टिप्पणी उत्तर 24 परगना जिले के आगरपाड़ा में प्रदीप कर (57) के परिवार से मिलने के बाद की, जिन्होंने कथित तौर पर एनआरसी व एसआईआर प्रक्रिया के डर से मंगलवार को आत्महत्या कर ली थी। उनके घर से एक सुसाइड नोट मिला था जिसमें उन्होंने इस फैसले के लिए एनआरसी को लेकर व्यग्रता को जिम्मेदार ठहराया था।

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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