मुरैना:एक्सपायरी शराब वितरण मामले में आबकारी अधिकारी निलंबित, जांच रिपोर्ट के बाद कड़ी कार्रवाई

मुरैना में एक्सपायरी देशी मदिरा के वितरण का गंभीर मामला सामने आने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया। कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ द्वारा इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए तुरंत जांच के आदेश दिए गए। यह मामला 18 जून का है जब मद्य भंडारागार मुरैना से एक्सपायरी देशी शराब विभिन्न कम्पोजिट शराब दुकानों को भेजे जाने की जानकारी सामने आई।
जांच के लिए दो सदस्यीय दल का गठन
मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने तत्काल दो सदस्यीय जांच दल गठित किया। जांच दल को पूरे रिकॉर्ड, पोर्टल डेटा और भंडारागार के अभिलेखों की बारीकी से जांच करने के निर्देश दिए गए। जांच पूरी करने के बाद दल ने 24 जून को अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंप दी।
जांच रिपोर्ट में सामने आईं अनियमितताएं
जांच रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। रिपोर्ट के अनुसार कार्यवाहक जिला आबकारी अधिकारी और तत्कालीन मद्य भंडारागार अधिकारी की लॉगिन आईडी और डिजिटल हस्ताक्षर का उपयोग कर एक्सपायरी शराब का वितरण किया गया। जांच में पाया गया कि 9 जून को 200 पेटी, 12 जून को 60 पेटी और 15 जून को 25-25 पेटी (कुल 310 पेटी) देशी मदिरा (60 यूपी, 180 एमएल) विभिन्न दुकानों को सप्लाई की गई। सबसे गंभीर बात यह रही कि यह शराब 25 अप्रैल 2025 को निर्मित हुई थी और इसकी वैधता 25 अप्रैल 2026 को समाप्त हो चुकी थी। नियमों के अनुसार एक्सपायरी शराब को नष्ट किया जाना चाहिए था लेकिन इसके बजाय उसका वितरण कर दिया गया।
ये भी पढ़ें: फ्रांस में पैराशूट ट्रेनिंग विमान क्रैश : 11 लोगों की मौत; टेक ऑफ करते ही हुआ हादसा
शासकीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही
जांच रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया कि पीईटी बोतलों में पैक एक्सपायरी शराब के सेवन से मानव स्वास्थ्य पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसे शासकीय दायित्वों के निर्वहन में बड़ी लापरवाही माना गया।
आबकारी अधिकारी निलंबित
जांच रिपोर्ट के आधार पर आबकारी आयुक्त दीपक कुमार सक्सेना ने कार्यवाहक जिला आबकारी अधिकारी जितेन्द्र सिंह गुर्जर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम-9 के तहत की गई है। साथ ही इसे मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के नियम 3(1) और 3(2) का उल्लंघन माना गया है। निलंबन के बाद उनका मुख्यालय कार्यालय आबकारी आयुक्त, मध्यप्रदेश ग्वालियर निर्धारित किया गया है।
ये भी पढ़ें: कटनी में बिटकॉइन निवेश के नाम पर 1.09 लाख की साइबर ठगी, 30% मुनाफे का झांसा देकर खाते से उड़ाए रुपए
प्रशासन की सख्त निगरानी
इस पूरे मामले के बाद प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में इस तरह की किसी भी लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।












