दरअसल, विधायक प्रदीप पटेल एक कांग्रेस नेता के समर्थन में धरने पर बैठे थे। विधायक विनोद खोडवानी के पक्ष में धरना देने पहुंचे थे। तब गांव वालों ने विधायक पर सीधा आरोप लगाया कि वे किसी जनसेवा के लिए नहीं, बल्कि भू-माफियाओं के पक्ष में खड़े हैं और जमीन विवाद में एकतरफा भूमिका निभा रहे हैं।
स्थिति उस समय और बिगड़ गई, जब दूसरे पक्ष के व्यक्ति लल्लू पाण्डेय को पुलिस ने थाने भेज दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि यह कार्रवाई विधायक के दबाव में की गई। इस कदम से गुस्साए परिजनों और समर्थकों का आक्रोश फूट पड़ा। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि कुछ लोगों ने आत्मदाह की कोशिश तक कर डाली। इसके बाद मऊगंज के हालात बिगड़ गए। गुस्साए लोगों ने कहा आप यहां से जाइए।
ग्रामीणों ने विधायक को चारों ओर से घेर लिया और तीखे सवाल पूछने लगे। भीड़ का कहना था कि जब मामला अदालत में है, तो एक जनप्रतिनिधि को बीच में आकर नेतागिरी करने का अधिकार किसने दिया। नारेबाजी तेज होती चली गई और मुर्दाबाद के नारों से माहौल और उग्र हो गया। तब पुलिसकर्मियों ने बेकाबू भीड़ से विधायक को किसी तरह बचाकर बाहर निकाला। अगर उस दौरान पुलिसकर्मी सूझबूझ का परिचय नहीं देते तो किसी अप्रिय घटना होने से इनकार नहीं किया जा सकता था।