भारत में प्रदर्शनों पर मार्को रुबियो का बयान, UN एक्सपर्ट्स की विश्वसनीयता पर उठाए सवाल

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों पर संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों की आलोचना पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत के घरेलू राजनीतिक मामलों में दखल नहीं देगा। रुबियो ने लोकतंत्र में लोगों के अपनी बात रखने और राजनीतिक मतभेद जाहिर करने को चर्चा का हिस्सा बताया। वहीं, संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने प्रदर्शनों के दौरान कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
रुबियो बोले- भारत के घरेलू मामलों पर टिप्पणी नहीं करूंगा
मार्को रुबियो से जब भारत में विपक्षी दलों और छात्र संगठनों के प्रदर्शनों और संयुक्त राष्ट्र की आलोचना को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत के घरेलू राजनीतिक मामलों में दखल नहीं देगा। संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों पर तंज कसते हुए रुबियो ने कहा, “UN एक्सपर्ट्स, हां, मेरे पसंदीदा। UN एक्सपर्ट्स, या यह अपने आप में ही विरोधाभास है?” उन्होंने कहा कि भारत एक लोकतंत्र है, जहां चुनाव होते हैं। उनके मुताबिक, लोकतांत्रिक देशों में लोगों का अपनी बात रखना और अलग-अलग विचार सामने आना राजनीतिक चर्चा का हिस्सा है।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन और हिंसा में बताया अंतर
रुबियो ने शांतिपूर्ण विरोध और हिंसक घटनाओं के बीच अंतर पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि वह उन घटनाओं की बात नहीं कर रहे, जिनमें लोग तोड़फोड़ करते हैं, इमारतों में घुसते हैं या उनमें आग लगाते हैं। उन्होंने कहा कि जब लोग अपनी बात रखने के लिए बाहर आते हैं, तो यह राजनीतिक चर्चा और अलग-अलग विचारों के लिए जगह होने को दिखाता है। रुबियो ने क्यूबा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां विपक्ष के लोगों को अपनी बात रखने पर जेल, दमन या देश छोड़ने जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।
UN विशेषज्ञों ने क्या आरोप लगाए?
रुबियो का बयान संयुक्त राष्ट्र के 20 से ज्यादा मानवाधिकार विशेषज्ञों की टिप्पणी के एक दिन बाद आया। विशेषज्ञों ने भारत में हालिया प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की थी। विशेषज्ञों ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया गया, लोगों को मनमाने तरीके से हिरासत में लिया गया और सभाएं करने पर पाबंदियां लगाई गईं। उन्होंने भारत सरकार से कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की जांच कराने और निहत्थे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल का इस्तेमाल रोकने की अपील की।
SIR के विरोध में हो रहे हैं प्रदर्शन
ये प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर हो रहे हैं। विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और कथित अनियमितताओं को लेकर चिंता जताई है। वहीं, चुनाव आयोग का कहना है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची से डुप्लीकेट नाम, मृत लोगों के नाम, दूसरी जगह जा चुके लोगों के नाम और अन्य अपात्र मतदाताओं के नाम हटाना है। आयोग के मुताबिक, जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उन्हें अपील करने का मौका दिया गया है।
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भारत ने अंतरराष्ट्रीय आलोचना को बताया आंतरिक मामलों में दखल
भारत पहले भी प्रदर्शनों को लेकर अंतरराष्ट्रीय आलोचना पर आपत्ति जता चुका है। संयुक्त राष्ट्र में भारतीय राजनयिक बरखा ताम्रकार ने कहा कि मानवाधिकारों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने या चुनिंदा देशों को निशाना बनाने के लिए नहीं होना चाहिए। उन्होंने भारत में संवैधानिक सुरक्षा उपायों का बचाव करते हुए कहा कि अधूरे आंकड़ों या अपुष्ट आरोपों के आधार पर देश की नकारात्मक तस्वीर पेश करना ठीक नहीं है। वहीं, संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की स्वतंत्र जांच की मांग दोहराई है।




















