Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

‘आप Gen Z नहीं हैं!’ जज की टिप्पणी के बाद CJP नेताओं ने वापस ली याचिका, बॉन्ड और प्रदर्शन पर उठाए सवाल

दिल्ली हाईकोर्ट में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका पर सुनवाई हुई। अदालत ने जमानत बॉन्ड की शर्तों और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की कोशिश को लेकर सवाल पूछे। सुनवाई के दौरान दोनों की उम्र भी पूछी गई। इसके बाद उनके वकील ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।
‘आप Gen Z नहीं हैं!’ जज की टिप्पणी के बाद CJP नेताओं ने वापस ली याचिका, बॉन्ड और प्रदर्शन पर उठाए सवाल
दिल्ली हाईकोर्ट में CJP नेताओं की सुनवाई

नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट में बुधवार को CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान न्यायमूर्ति सुब्रमणियम प्रसाद ने दोनों से उनके संगठन के उद्देश्य और जमानत बॉन्ड की शर्तों के पालन को लेकर सवाल किए। अदालत में उनकी उम्र का भी जिक्र हुआ और टिप्पणी की गई कि वे Gen Z नहीं हैं। सुनवाई के बीच दोनों नेताओं के वकील ने याचिका वापस लेने की मांग की। अदालत ने इसकी अनुमति दे दी।

अदालत ने बॉन्ड की शर्तों पर उठाए सवाल

दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान अदालत ने पूछा कि जब दोनों नेताओं ने पहले बॉन्ड पर हस्ताक्षर किए थे, तो उसकी शर्तों का पालन क्यों नहीं किया गया। अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि प्रतिबंध के बावजूद वे जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने क्यों पहुंचे थे। न्यायमूर्ति ने कहा कि विरोध करने का अधिकार अपनी जगह है, लेकिन अगर किसी गतिविधि से शांति भंग होने का खतरा पैदा होता है, तो उस पहलू पर भी विचार करना जरूरी है।

सोनभद्र में दशहरा मेले की खुशियां मातम में बदलीं! कार-टेंपो की टक्कर में 3 की मौत, 16 घायल

उम्र पूछकर Gen Z पर की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान अदालत ने सौरव दास और आशुतोष रांका की उम्र पूछी। उनके वकील ने बताया कि सौरव की उम्र 27 साल और आशुतोष की 31 साल है। इस पर अदालत ने टिप्पणी की कि वे Gen Z नहीं हैं। न्यायाधीश ने संगठन के उद्देश्य और उसकी गतिविधियों को लेकर भी सवाल किए। अदालत ने कहा कि यह समझना जरूरी है कि संगठन किस मकसद से काम कर रहा है और उसके सदस्यों की भूमिका क्या है।

प्रदर्शन के अधिकार पर भी चर्चा

अदालत ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन करना अधिकार है लेकिन इसके साथ कानून का पालन करना भी जरूरी है। सुनवाई के दौरान दूसरे देशों में छात्र आंदोलनों के बाद हुई हिंसा और आगजनी का भी जिक्र किया गया। अदालत ने आशंका जताई कि अगर प्रदर्शन के दौरान बैरिकेड तोड़े जाते हैं, तो दूसरे लोग भी ऐसा कर सकते हैं और स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है। न्यायाधीश ने नेताओं से पूछा कि पहले बॉन्ड भरने के बाद कथित तौर पर उसकी शर्तों का उल्लंघन क्यों हुआ।

दोबारा गिरफ्तारी के बाद पहुंचे थे हाईकोर्ट

सौरव दास, आशुतोष रांका और अभिजीत दीपके को 10 अक्टूबर को दिल्ली एयरपोर्ट पर उस समय गिरफ्तार किया गया था, जब वे जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में शामिल होने के लिए आ रहे थे। उसी दिन बॉन्ड भरने के बाद उन्हें छोड़ दिया गया था। इसके बाद 14 अक्टूबर को सौरव और आशुतोष को प्रदर्शन की कोशिश के मामले में फिर गिरफ्तार किया गया और पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

1.3 मिलियन फॉलोअर्स वाले फाइनेंस इन्फ्लुएंसर की मौत से मचा हड़कंप, पिता ने CEO पर लगाए गंभीर आरोप..!

अब दोपहर दो बजे की सुनवाई पर नजर

स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने 19 अक्टूबर के आदेश में कहा था कि दोनों नेताओं ने बॉन्ड की शर्तों का जानबूझकर उल्लंघन किया और शांति भंग होने की आशंका पैदा की। इसी आदेश को चुनौती देते हुए उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया था। बुधवार को सुनवाई के दौरान उनके वकील अभिक चिमनी ने याचिका वापस लेने की मांग की, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया।

Aditi Rawat
By Aditi Rawat

अदिति रावत | MCU, भोपाल से M.Sc.(न्यू मीडिया टेक्नॉलजी)| एंकर, न्यूज़ एक्ज़िक्यूटिव की जिम्मेदारियों...

Latest Posts