भोपाल। दत्तक पुत्र के नाम पर पुश्तैनी भूमि का नामांतरण करने के बदले 40 हजार रुपए की रिश्वत की बात करके 30 हजार रुपए नगद ले रहे पटवारी को मंदसौर जिले की सुवासरा तहसील कार्यालय में ही लोकायुक्त उज्जैन पुलिस टीम ने रंगे हाथों धर-दबोचा। इसके बाद अब रिश्वतखोर पटवारी के पास अटके हुए कामों की जांच शुरू हो गई है। साथ ही पटवारी के रिश्वत के हिस्सेदार अधिकारी और कर्मचारियों के बारे में भी पता किया जा रहा है।
इस बारे में लोकायुक्त उज्जैन पुलिस अधीक्षक ने पीपुल्स समाचार को बताया कि शिकायतकर्ता दिनेश चंद्र जोशी निवासी ग्राम धलपत तहसील सुवासरा जिला मंदसौर ने लिखित शिकायत की थी। इसमें बताया गया था कि उसके बड़े भाई स्व. भगवती प्रसाद को कोई संतान नहीं थी। ऐसे में बड़े भाई ने अपने छोटे भाई यानि शिकायतकर्ता दिनेश चंद्र जोशी के लड़के आनंद जोशी को गोद लेकर दत्तक पुत्र बनाया था। भाई भगवती प्रसाद के नाम पर दर्ज कृषि भूमि का नामांतरण उनके दत्तक पुत्र आनन्द के नाम से करवाने के कार्य के लिए वह हल्का पटवारी हरीश पाटीदार से मिला तो पटवारी ने नामांतरण कार्य के बदले 40 हजार रुपये रिश्वत की मांग की।
जांच में साबित हुआ कि पटवारी हरीश पाटीदार ने 40 हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी, जिसकी पहली किश्त 10 हजार रुपए पहले ही ले चुका था। इसके बाद बाकी 30 हजार रुपए रिश्वत देने के बाद ही काम करने पर अड़ा था। इसके बारे में पटवारी और शिकायतकर्ता के बीच हुई बातचीत का रिकार्ड भी लोकायुक्त जांच टीम के पास है।
रिश्वत मांगने की शिकायत का सत्यापन किया गया तो सही साबित होने के बाद उज्जैन लोकायुक्त पुलिस की ट्रैप टीम बनाई गई। इसके बाद टीम ने तहसील सुवासरा की घेराबंदी की, जिसके बाद शिकायतकर्ता को रिश्वत देने के लिए भेजा किया गया। आवेदक से जैसे ही पटवारी ने 30 हजार रुपए की नगद रिश्वत ली, वैसे ही पटवारी हरीश पाटीदार को तहसील कार्यालय सुवासरा में ही रंगे ट्रैप टीम ने रंगे हाथों धर पकड़ा।
लोकायुक्त की ट्रैप टीम में शामिल निरीक्षक राजेंद्र वर्मा, आरक्षक उमेश जाटव, आरक्षक विशाल रेशमिया, आरक्षक नेहा मिश्रा, आरक्षक हितेश ललावत, आरक्षक इसरार ने पटवारी को रिश्वत लेते ही पकड़ लिया। इसके बाद पटवारी के हाथ धुलवाते ही गुलाबी हो गए। पटवारी के पास से नंबर लिखे नोट भी बरामद किए गए। इसके बाद आगे की जांच की गई।
सूत्रों के अनुसार शिकायतकर्ता किसान चार दिन पहले एसडीएम सीतामऊ के यहां गुहार लगाई थी। तब जांच करवाकर कार्रवाई का भरोसा दिलाया गया था, लेकिन पटवारी के खिलाफ कोई एक्शन नहीं हुआ। यह भी बताया जाता है कि शिकायतकर्ता किसान ने इस मामले की शिकायत तहसील से लेकर कई जगह की थी, लेकिन सुनवाई नहीं होने के बाद ही लोकायुक्त पहुंचा।
सुवासरा तहसील मे पदस्थ राजस्व निरीक्षक (गिरदावर) भारतसिंह देवड़ा पर पर भी शिकायतकर्ता ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। इसमें किसान ने बताया है कि राजस्व निरीक्षक द्वारा आए दिन मुझे परेशान किया जाता है और पैसे की मांग करता है। उल्लेखनीय होगा कि राजस्व निरीक्षक भारतसिंह देवड़ा आए दिन विवादों में रहते हैं। पूर्व में सीतामऊ में विवादित वीडियो वायरल होने के बाद निलंबित भी हो चुके हैं।
पटवारी को रिश्वत लेते पकडे जाने के बाद उसके पास लंबे समय से लंबित कामों की जांच करने के साथ ही उसके कामों में शामिल रहने वालों की भी जांच होगी। इसके नतीजों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
-आनंद यादव, पुलिस अधीक्षक, लोकायुक्त उज्जैन