भोपाल। मप्र सरकार के बजट पर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि यह बजट प्रदेश की जनता के साथ छलावा है और जमीनी हकीकत से पूरी तरह कटा हुआ है। उन्होंने कहा कि वित्तमंत्री स्वयं स्वीकार कर रहे हैं कि राजकोषीय घाटा 74 हजार करोड़ रुपए से अधिक होगा। जब सरकार के पास संसाधन ही नहीं हैं, तो घोषित योजनाओं को पूरा करने के लिए पैसा कहां से आएगा? यह बजट सिर्फ घोषणाओं का पुलिंदा है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि किसानों की आय दुगनी करने का वादा किया गया था, लेकिन बजट में इस पर कोई स्पष्ट नीति, योजना या समय सीमा नहीं है। किसान आज भी लागत और कर्ज के बोझ तले दबा है। जो MSP के वादे किए गए थे वो भी पूरे नहीं हुए। सिंघार ने कहा कि प्रदेश के लाखों बेरोजगार युवाओं को उम्मीद थी कि भर्ती, नई नौकरियों और रोजगार सृजन पर ठोस प्रावधान होंगे, लेकिन बजट में इस पर कोई ठोस घोषणा नहीं की गई। संविदा भर्ती की बात कही गयी है, इससे नौकरी पाने वाले पर हमेशा तलवार लटकी रहेगी।
सिंघार ने कहा कि प्रदेश के कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी को लेकर बजट में कोई प्रावधान नहीं है। यह कर्मचारियों के साथ अन्याय है। नर्मदा किनारे 5 हजार हेक्टेयर में वृक्षारोपण की बात की जा रही है। जब वित्तीय स्थिति कमजोर है तो यह योजना कैसे लागू होगी? बिजली की दरें कम करने पर कोई घोषणा नहीं की गई। आम जनता महंगे बिलों से परेशान है, लेकिन सरकार ने राहत देने की कोई मंशा नहीं दिखाई। सिंघार ने कहा कि यह बजट विकास का नहीं, भ्रम का दस्तावेज है। इसमें झूठे आंकड़े पेश कर जनता को गुमराह करने की कोशिश की गई है।
कसरावद विधायक एवं पूर्व कृषि मंत्री सचिन यादव ने कहा कि यह बजट प्रदेश की जनता की उम्मीदों के पूरी तरह विपरीत, हकीकत से दूर और विकास विरोधी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जमीनी सच्चाइयों से मुंह चुराते हुए केवल खोखले दावों और आंकड़ों की बाजीगरी के जरिए जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश आज बेरोजगारी, महंगाई, किसान संकट और सामाजिक असमानता जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है, लेकिन बजट में इन मूल मुद्दों के समाधान का कोई ठोस रोडमैप नजर नहीं आता।
सचिन यादव ने कहा कि सरकार पर लगभग 74,000 करोड़ रुपए का भारी राजकोषीय घाटा है। इसके बावजूद बजट में न तो इस घाटे को कम करने की कोई स्पष्ट रणनीति दिखाई देती है और न ही वित्तीय अनुशासन का कोई संकेत है। यह बजट आने वाले समय में प्रदेश की आर्थिक स्थिति को और कमजोर करेगा। यादव ने कहा कि आम जनता पहले से ही महंगाई की मार झेल रही है। रसोई गैस, खाद्य पदार्थ, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं लगातार महंगी हो रही हैं, लेकिन इस बजट में आम आदमी को राहत देने के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया है। यह बजट गरीब, मध्यम वर्ग और मजदूर वर्ग की पीड़ा को पूरी तरह नजरअंदाज करता है। अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह समझौता प्रदेश और देश के किसानों के हितों के खिलाफ है और यह कृत्य देश के किसानों की कब्र खोदने जैसा है ।