तुम लोग बेकार हो…'डीके-डीके' के नारों पर नाराज हुए खड़गे, बोले- यह कांग्रेस का कार्यक्रम है, किसी एक नेता का नहीं

बेंगलुरु। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में आयोजित कांग्रेस के एक अहम कार्यक्रम के दौरान उस समय अजीब स्थिति बन गई, जब मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के समर्थन में कार्यकर्ताओं ने जोर-जोर से 'डीके-डीके' के नारे लगाने शुरू कर दिए। मंच पर मौजूद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे इससे नाराज हो गए और उन्होंने सार्वजनिक रूप से कार्यकर्ताओं को कड़ी फटकार लगाते हुए साफ कहा कि यह किसी एक नेता का नहीं, बल्कि पूरी कांग्रेस पार्टी का कार्यक्रम है। यह घटना कर्नाटक कांग्रेस के नए प्रदेश अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद के पदभार ग्रहण समारोह के दौरान हुई।
खड़गे बोले- पार्टी सबसे ऊपर, नेता बाद में
नारेबाजी बढ़ने पर खड़गे ने माइक संभाला और कार्यकर्ताओं को शांत रहने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि हर कोई अगर अपने-अपने पसंदीदा नेता के नाम के नारे लगाने लगे, तो कार्यक्रम का उद्देश्य खत्म हो जाएगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का हर नेता पार्टी की वजह से पहचाना जाता है। इसलिए किसी भी व्यक्ति से पहले पार्टी का सम्मान होना चाहिए।
खड़गे ने अपने लंबे राजनीतिक अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने करीब 58 वर्षों तक राजनीति की है और इस दौरान पार्टी ने कई नेताओं को पहचान और जिम्मेदारी दी है। ऐसे में सभी कार्यकर्ताओं की पहली जिम्मेदारी संगठन को मजबूत करना होनी चाहिए।
मंच से लगाई फटकार, बोले- बेकार हो तुम लोग
नारेबाजी जारी रहने पर खड़गे का गुस्सा और बढ़ गया। उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम कांग्रेस को मजबूत करने के लिए आयोजित किया गया है, न कि किसी एक नेता का शक्ति प्रदर्शन करने के लिए। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि अगर एक समूह एक नेता के नारे लगाए और दूसरा किसी दूसरे नेता के, तो बाकी लोग यहां किसलिए आए हैं? इस दौरान उन्होंने अनुशासनहीनता पर तीखी नाराजगी जताई।
फुटेज देखकर होगी कार्रवाई
खड़गे ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि कार्यक्रम की पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग मौजूद है। उन्होंने कहा कि नारेबाजी और अनुशासन तोड़ने वाले कार्यकर्ताओं की पहचान फुटेज के जरिए की जाएगी और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। उन्होंने दोहराया कि, कांग्रेस में अनुशासन सर्वोपरि है और पार्टी के कार्यक्रमों में व्यक्तिगत राजनीति को जगह नहीं दी जा सकती।
डीके शिवकुमार ने भी समर्थकों को कराया शांत
जब नारेबाजी तेज हुई तो मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार भी अपनी सीट से खड़े हो गए। उन्होंने हाथ के इशारे से समर्थकों को बैठने और शांत रहने की अपील की। इसके बाद कुछ देर में माहौल सामान्य हुआ, लेकिन तब तक खड़गे अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर कर चुके थे।
राम मंदिर के चंदे को लेकर साधा निशाना
अपने संबोधन के दौरान मल्लिकार्जुन खड़गे ने अयोध्या के राम मंदिर के लिए जुटाए गए चंदे को लेकर भी भाजपा सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर निर्माण के लिए जुटाई गई राशि में हजारों करोड़ रुपए की गड़बड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि, भगवान राम के नाम पर किसी तरह की वित्तीय अनियमितता नहीं होनी चाहिए और पूरे मामले की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
क्यों अहम है यह पूरा मामला?
यह घटना ऐसे समय हुई है जब कर्नाटक कांग्रेस हाल ही में नेतृत्व परिवर्तन के दौर से गुजरी है। 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच लंबी खींचतान चली थी। पार्टी नेतृत्व ने शुरुआत में सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री बनाया था, जबकि डीके शिवकुमार को उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई।
इसके बाद लंबे समय तक 'ढाई-ढाई साल' के फॉर्मूले की चर्चा होती रही। आखिरकार 28 मई 2026 को सिद्धारमैया ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया और 3 जून 2026 को डीके शिवकुमार ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।
डीके शिवकुमार की राजनीतिक प्रोफाइल
डीके शिवकुमार कर्नाटक के प्रभावशाली वोक्कालिगा समुदाय से आते हैं और कनकपुरा विधानसभा सीट से विधायक हैं। उन्हें कांग्रेस का मजबूत संगठनकर्ता और चुनाव प्रबंधन का विशेषज्ञ माना जाता है। उन्होंने 1989 में पहली बार विधायक के रूप में विधानसभा में प्रवेश किया। इसके बाद कई बार मंत्री रहे, 2020 में कर्नाटक कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बने, 2023 में उपमुख्यमंत्री बने और अब 2026 में राज्य के मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
संपत्ति और कानूनी मामले
चुनावी हलफनामे के अनुसार डीके शिवकुमार के पास करीब 1,400 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति है। उनके ऊपर लगभग 263 करोड़ रुपए का कर्ज भी दर्ज है। उनका नाम आय से अधिक संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों में भी सामने आया है। 2017 में आयकर विभाग की कार्रवाई के बाद 2019 में उन्हें प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गिरफ्तार किया था और उन्हें करीब 50 दिन तिहाड़ जेल में रहना पड़ा था। उनके खिलाफ विभिन्न एजेंसियों की जांच भी चल चुकी है।











