Naresh Bhagoria
14 Jan 2026
भोपाल के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय में इस साल मकर संक्रांति का उत्सव धूमधाम से मनाया गया। यह पर्व भारत में केवल ऋतु परिवर्तन का प्रतीक नहीं बल्कि पारंपरिक सांस्कृतिक और सामाजिक मेल-जोल का भी प्रतिनिधित्व करता है। संग्रहालय में आयोजित इस उत्सव में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और आकाश में उड़ती रंग-बिरंगी पतंगों के नजारे का आनंद लिया।
इस साल के मकर संक्रांति उत्सव का सबसे खास हिस्सा था पतंगबाजी। बच्चों, युवाओं और परिवारों ने मिलकर आकाश में पतंगें उड़ाईं। हर पतंग की उड़ान में उल्लास और खुशी झलक रही थी। छोटे बच्चे पहली बार पतंग उड़ाते नजर आए, वहीं युवा पूरी उत्सुकता और रणनीति के साथ एक-दूसरे की पतंग काटने में लगे हुए थे।

संग्रहालय का मैदान इस दिन रंग-बिरंगी पतंगों और खुशियों से गुलजार हो गया। पतंगों की कतार और बच्चों की हंसी-मजाक ने इस त्योहार को और भी जीवंत बना दिया।
इस अवसर पर पतंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें सभी आयु वर्ग के लोग शामिल हुए। प्रतियोगिता को तीन श्रेणियों में बांटा गया: बाल श्रेणी, ओपन श्रेणी और प्रोफेशनल श्रेणी, ताकि हर कोई अपनी प्रतिभा दिखा सके। विजेताओं को नकद पुरस्कार और प्रशंसा पत्र देकर उनकी प्रतिभा को सम्मानित किया गया।

प्रतियोगिता में शामिल अधिकांश प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और मैदान में हर तरफ हंसी और खुशी की गूंज सुनाई दी। इस दौरान आने वाले लोगों के लिए निःशुल्क पतंग वितरण की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई थी।
मकर संक्रांति के इस उत्सव ने न केवल बच्चों और युवाओं को आनंदित किया, बल्कि पूरे परिवार को एक साथ लाकर सामूहिक खुशी का अनुभव कराया। माता-पिता अपने बच्चों के साथ पतंग उड़ाते हुए उत्सव का मजा ले रहे थे। इस प्रकार, यह आयोजन पारिवारिक और सामुदायिक जुड़ाव का प्रतीक भी बन गया।
ईगल पतंग (Eagle Kite): बड़ी और आकर्षक, आसमान में majestically उड़ती हुई।
एरोप्लेन पतंग (Aeroplane Kite): हवाई जहाज जैसी आकृति, उड़ान में सबसे अलग नजर आई।
ड्रैगन पतंग (Dragon Kite): लंबी पूंछ वाली ड्रैगन पतंग ने उत्सव का रोमांच बढ़ाया।
फैंसी पतंग (Fancy Kite): रंग-बिरंगे पैटर्न और डिजाइन वाली पतंगें, बच्चों की पसंदीदा।
संग्रहालय द्वारा चर्खा और धागे का निःशुल्क वितरण भी किया गया, जिससे सभी लोग अपने हाथों से पतंग उड़ाने का अनुभव ले सके।
पतंग उत्सव के दौरान छोटे-छोटे सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। स्थानीय कलाकारों ने लोकगीत और पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किए, जिससे कार्यक्रम और भी रंगीन और मनोरंजक बन गया। इसके अलावा, पारंपरिक व्यंजन और तिल-गुड़ से बने पकवान भी उपलब्ध कराए गए, जो लोगों को भारतीय खानपान की विविधता से परिचित कराते रहे।