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संयुक्त राष्ट्र से मिला बड़ा सम्मान,कौन हैं मेजर अभिलाषा बराक? पीएम मोदी ने भी दी बधाई

भारतीय सेना की पहली महिला कॉम्बैट हेलीकॉप्टर पायलट मेजर अभिलाषा बराक को संयुक्त राष्ट्र का प्रतिष्ठित मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर अवॉर्ड मिला है। जानिए कौन हैं मेजर बराक, लेबनान में उनकी भूमिका क्या है और पीएम मोदी ने उनकी उपलब्धि पर क्या कहा।
कौन हैं मेजर अभिलाषा बराक? पीएम मोदी ने भी दी बधाई
संयुक्त राष्ट्र से एक बड़ा सम्मान मिलने के बाद मेजर अभिलाषा बराक सुर्खियों में हैं

भारतीय सेना की अधिकारी मेजर अभिलाषा बराक को संयुक्त राष्ट्र की ओर से प्रतिष्ठित 'यूएन मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर' अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। इस उपलब्धि के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई देते हुए उनकी सेवा और नेतृत्व की सराहना की है। मेजर अभिलाषा बराक न केवल भारतीय सेना की पहली महिला कॉम्बैट हेलीकॉप्टर पायलट हैं, बल्कि अब उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देश का नाम रोशन किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि मेजर अभिलाषा बराक को यह सम्मान मिलना पूरे देश के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल (यूएनआईएफआईएल) के तहत उनकी सेवाएं भारत के लंबे शांति मिशन योगदान को भी दर्शाती हैं। पीएम मोदी ने कहा कि उनकी यह उपलब्धि देश के युवाओं, खासकर बेटियों के लिए प्रेरणादायक है।

कौन हैं मेजर अभिलाषा बराक?

मेजर अभिलाषा बराक भारतीय सेना की उन चुनिंदा महिला अधिकारियों में शामिल हैं जिन्होंने कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। साल 2018 में उन्हें आर्मी एयर डिफेंस कोर में कमीशन मिला था। इसके बाद उन्होंने वर्ष 2022 में नासिक स्थित कॉम्बैट आर्मी एविएशन ट्रेनिंग स्कूल से प्रशिक्षण पूरा कर भारतीय सेना की पहली महिला कॉम्बैट हेलीकॉप्टर पायलट बनने का गौरव हासिल किया। उनकी यह उपलब्धि उस समय भी चर्चा में रही थी क्योंकि इससे सेना में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और नेतृत्व क्षमता को नई पहचान मिली थी। अब संयुक्त राष्ट्र से मिला यह सम्मान उनके करियर की एक और बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

लेबनान में निभा रही हैं अहम भूमिका

मेजर अभिलाषा बराक इस समय लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल (यूएनआईएफआईएल) के तहत भारतीय बटालियन के साथ एंगेजमेंट टीम कमांडर और जेंडर फोकल प्वाइंट के रूप में तैनात हैं। यह मिशन इजरायल और लेबनान सीमा क्षेत्र में संचालित होता है, जिसे दुनिया के सबसे संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण शांति मिशनों में गिना जाता है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार मेजर बराक ने स्थानीय समुदायों के साथ विश्वास कायम करने, महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और नागरिक सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके प्रयासों से हजारों महिलाओं और लड़कियों को शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास से जुड़ी योजनाओं का लाभ मिला है।

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पुरस्कार मिलने पर क्या बोलीं मेजर बराक?

सम्मान मिलने के बाद मेजर अभिलाषा बराक ने कहा कि सपनों का कोई जेंडर नहीं होता और न ही नेतृत्व, साहस या मानवता की सेवा करने की इच्छा का कोई जेंडर होता है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान इस बात की याद दिलाता है कि स्थायी शांति तभी संभव है जब समाज के हर वर्ग की आवाज सुनी जाए और सभी को आगे बढ़ने का समान अवसर मिले। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा में है और लोग इसे महिलाओं के सशक्तिकरण से जोड़कर देख रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र ने भी की सराहना

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने मेजर अभिलाषा बराक की सराहना करते हुए उन्हें एक प्रेरणादायक अधिकारी बताया। उन्होंने कहा कि मेजर बराक उन लोगों के लिए आदर्श हैं जिनके साथ वे काम करती हैं और जिनकी सेवा करती हैं। वहीं संयुक्त राष्ट्र की सहायक महासचिव लिसा बटेनहेम ने कहा कि मेजर बराक के नेतृत्व और नए विचारों ने शांति अभियानों में महिलाओं की भूमिका को मजबूत करने में अहम योगदान दिया है। उनके काम ने यह साबित किया है कि शांति मिशनों में महिलाओं की भागीदारी कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है।

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देश के लिए गर्व की उपलब्धि

मेजर अभिलाषा बराक भारत की तीसरी महिला अधिकारी हैं जिन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान मिला है। उनसे पहले मेजर सुमन गवानी और मेजर राधिका सेन को भी यह अवॉर्ड मिल चुका है। 

Sona Rajput
By Sona Rajput

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...Read More

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