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महाशिवरात्रि पर महाकुंभ का अंतिम स्नान : श्रद्धालुओं पर हेलिकॉप्टर से की गई पुष्प वर्षा, प्रयागराज नो-व्हीकल जोन

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महाशिवरात्रि पर महाकुंभ का अंतिम स्नान : श्रद्धालुओं पर हेलिकॉप्टर से की गई पुष्प वर्षा, प्रयागराज नो-व्हीकल जोन
प्रयागराज। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर आज प्रयागराज में 45 दिन तक चले महाकुंभ का भव्य समापन हो जाएगा। सुबह 6 बजे तक 41.11 लाख श्रद्धालु संगम में पुण्य स्नान कर चुके थे। पिछले 44 दिन में 65 करोड़ श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई। वहीं शिवरात्रि पर 3 करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। इसका मतलब है कि, कुल आंकड़ा 66 से 67 करोड़ तक पहुंच जाएगा। योगी सरकार ने दावा किया कि दुनिया में हिंदुओं की आधी आबादी के बराबर लोग यहां आए हैं।

मानव इतिहास का सबसे बड़ा आयोजन

उत्तर प्रदेश सरकार ने महाकुंभ को इतिहास का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन बताया है। योगी सरकार का दावा है कि, इस आयोजन में दुनिया के हिंदुओं की आधी आबादी के बराबर लोगों ने हिस्सा लिया। सनातन धर्म को मानने वाले दुनिया के 60 प्रतिशत से अधिक लोगों ने संगम में स्नान किया। संगम में डुबकी लगाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या अमेरिका की कुल आबादी से दोगुनी, रूस की चार गुनी और जापान की पांच गुनी से अधिक है।

शहर में वाहनों की नो-एंट्री, सुरक्षा के कड़े इंतजाम

महाकुंभ के अंतिम स्नान को देखते हुए प्रयागराज में 25 फरवरी की शाम से वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है। पूरे मेले क्षेत्र में ट्रैफिक डायवर्जन लागू कर दिया गया है। संगम मार्गों पर भारी भीड़ उमड़ रही है, वहीं घाटों पर स्नान के बाद श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकाला जा रहा है ताकि भीड़ अनियंत्रित न हो।

श्रद्धालुओं पर हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा

महाकुंभ की भव्यता को और अधिक दिव्य बनाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने श्रद्धालुओं पर हेलिकॉप्टर से पुष्प वर्षा कराई। जब श्रद्धालु संगम में डुबकी लगा रहे थे, तभी आसमान से बरसते फूलों ने इस आध्यात्मिक आयोजन को और भी अद्भुत बना दिया।

सरकार के लिए बड़ी परीक्षा, विपक्ष के सवाल

महाकुंभ के दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं की मौजूदगी योगी सरकार की प्रशासनिक क्षमता की परीक्षा रही। जहां सरकार ने इसे अब तक का सबसे सफल आयोजन बताया। वहीं विपक्ष ने संगम के जल की गुणवत्ता और व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठाए।

महाकुंभ से विश्व को आध्यात्मिक संदेश

हर 12 साल में आयोजित होने वाला महाकुंभ केवल एक धार्मिक मेला नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति का एक वैश्विक संगम है। करोड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया कि, आस्था की डोर से जुड़े लोग धर्म, जाति और राष्ट्रीय सीमाओं से परे एकजुट हो सकते हैं। महाशिवरात्रि के पावन दिन के साथ यह भव्य आयोजन समाप्त हो रहा है, लेकिन इसकी आध्यात्मिक ऊर्जा लंबे समय तक लोगों के जीवन में संचार करती रहेगी। ये भी पढ़ें- Mahashivratri 2025 : महाशिवरात्रि आज… जानें शुभ मुहूर्त, महत्व और चार पहर के पूजन का सही समय
Manisha Dhanwani
By Manisha Dhanwani

मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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