5 साल बाद महंगा होगा बस का सफर!12 से 20 प्रतिशत तक हो सकती है वृद्धि, बस संचालकों की मांग के बीच अगले सप्ताह होगी बैठक

भोपाल। मध्य प्रदेश में बसों से सफर करने वाले लाखों यात्रियों को आने वाले समय में अधिक किराया चुकाना पड़ सकता है। राज्य सरकार सार्वजनिक यात्री बसों के किराये में संशोधन की तैयारी कर रही है। इस संबंध में अगले सप्ताह किराया निर्धारण समिति की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। बैठक में वर्तमान किराया व्यवस्था, बस संचालकों की मांग और बढ़ती परिचालन लागत पर विस्तार से चर्चा होगी। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो लगभग पांच साल बाद बस किराये में बदलाव देखने को मिल सकता है। इससे जहां बस संचालकों को राहत मिलने की उम्मीद है, वहीं यात्रियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
बढ़ती लागत बनी किराया बढ़ाने की वजह
बस संचालकों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में डीजल की कीमतों, टैक्स, स्पेयर पार्ट्स और रखरखाव के खर्च में लगातार बढ़ोतरी हुई है। इसके बावजूद बस किराया लगभग पांच वर्षों से पुराने स्तर पर ही बना हुआ है। संचालकों का तर्क है कि मौजूदा दरों पर बसों का संचालन करना पहले की तुलना में अधिक महंगा हो गया है। इसी कारण वे लंबे समय से किराया बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
कितना बढ़ सकता है किराया
वर्तमान व्यवस्था के अनुसार बस यात्रा के लिए पहले किलोमीटर का न्यूनतम किराया सात रुपये है। इसके बाद प्रति किलोमीटर 1.40 रुपये की दर लागू होती है। परिवहन विभाग के स्तर पर इस दर को बढ़ाकर 1.50 रुपये प्रति किलोमीटर करने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि बस संचालक इससे अधिक वृद्धि चाहते हैं और उनकी मांग है कि किराया दो रुपये प्रति किलोमीटर तक किया जाए। अंतिम निर्णय समिति की बैठक में सभी पक्षों की राय सुनने के बाद लिया जाएगा।
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बैठक में शामिल होंगे बस संचालकों के प्रतिनिधि
किराया निर्धारण समिति की बैठक में बस संचालकों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि निर्णय लेते समय परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों की राय भी सामने आए। सरकार चाहती है कि ऐसा समाधान निकले जिससे बाद में किसी प्रकार का विवाद या विरोध की स्थिति पैदा न हो। इसी वजह से समिति में सभी संबंधित पक्षों को शामिल किया गया है।
नई परिवहन व्यवस्था से बदलेंगे नियम
राज्य सरकार जुलाई से इंदौर में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा शुरू करने की तैयारी कर रही है। इस योजना के तहत निजी बसों को अनुबंध के आधार पर संचालित किया जाएगा। नई व्यवस्था में यात्रियों की संख्या, टिकट व्यवस्था और किराया संग्रह की बेहतर निगरानी की जाएगी। इससे ओवरलोडिंग और किराये में गड़बड़ी जैसी समस्याओं पर नियंत्रण लगाने में मदद मिलेगी।
यात्रियों और संचालकों के बीच संतुलन की चुनौती
सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यात्रियों और बस संचालकों दोनों के हितों के बीच संतुलन बनाने की है। एक तरफ बढ़ती लागत के कारण संचालक किराया बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आम यात्रियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े, इसका भी ध्यान रखना होगा। समिति की बैठक में इसी संतुलन को ध्यान में रखकर फैसला लिए जाने की संभावना है।
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पांच साल बाद हो रहा है बड़ा फैसला
बस किराया पिछली बार वर्ष 2021 में संशोधित किया गया था। इसके बाद से आर्थिक परिस्थितियों में काफी बदलाव आया है। ऐसे में सरकार अब नई परिस्थितियों के अनुसार किराया व्यवस्था की समीक्षा कर रही है। अगले सप्ताह होने वाली बैठक में तय होगा कि आने वाले दिनों में बस यात्रा कितनी महंगी होगी।











