भोपाल से एक गिद्ध को कुछ दिन पहले खुले आसमान में छोड़ा गया था। यह सिर्फ एक पक्षी नहीं था, बल्कि एक ऐसी उड़ान का हिस्सा था जिसे वैज्ञानिक निगरानी में रखा गया था। लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि यह सफर उसे सीधे अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करवा देगा। भोपाल के हलाली डैम इलाके से उड़ान भरने वाला यह गिद्ध धीरे-धीरे राजस्थान की दिशा में आगे बढ़ा और फिर सीमाएं पार करते हुए पाकिस्तान तक पहुंच गया।
यह गिद्ध वन विहार नेशनल पार्क की निगरानी में था और इसके शरीर पर GPS ट्रैकिंग डिवाइस लगाया गया था। शुरुआत में सब कुछ सामान्य चल रहा था, लेकिन 7 अप्रैल 2026 को अचानक इसका GPS सिग्नल बंद हो गया।
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इससे वन विभाग और WWF-India की टीम अलर्ट हो गई। मामला सिर्फ एक पक्षी का नहीं था, बल्कि एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक ट्रैकिंग का था। तुरंत पाकिस्तान के संबंधित वन्यजीव विभाग से संपर्क साधा गया ताकि इसकी स्थिति का पता लगाया जा सके।
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जानकारी के अनुसार, इस गिद्ध को 30 मार्च 2026 को भोपाल और रायसेन जिले के बीच स्थित हलाली डैम क्षेत्र में छोड़ा गया था। यह पहले घायल अवस्था में मिला था, जिसका इलाज किया गया और फिर प्राकृतिक वातावरण में वापस छोड़ा गया। रिहाई के बाद इसने किसी तय दिशा में नहीं, बल्कि प्राकृतिक प्रवृत्ति के अनुसार उड़ान भरी। यह गिद्ध राजस्थान से होता हुआ अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर पाकिस्तान के खानेवाल जिले तक पहुंच गया। करीब 1274 किलोमीटर की यह यात्रा उसने सिर्फ 7 दिनों में पूरी कर ली, जो वन्यजीव विशेषज्ञों के लिए भी हैरानी का विषय है।

पाकिस्तान की WWF टीम के मुताबिक, 7 अप्रैल को खानेवाल और मुल्तान क्षेत्र में तेज ओलावृष्टि और तूफान आया था। इसी दौरान यह गिद्ध घायल हो गया। तूफान इतना तेज था कि कई पक्षी प्रभावित हुए। स्थानीय लोगों ने घायल गिद्ध को देखा और तुरंत वन्यजीव अधिकारियों को सूचना दी।
सूचना मिलते ही पाकिस्तानी वन्यजीव टीम ने गिद्ध को सुरक्षित रेस्क्यू किया और उसे चंगा मंगा वल्चर कैप्टिव ब्रीडिंग सेंटर में भेज दिया गया। यहां उसका इलाज शुरू हुआ। राहत की बात यह है कि अब गिद्ध धीरे-धीरे ठीक हो रहा है। वह सामान्य रूप से भोजन कर रहा है और उसकी हालत में सुधार देखा जा रहा है।