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MP Budget Session :मप्र विधानसभा में गूंजा डॉग बाइट केस का मुद्दा, सरकार बोली-जरूरी कदम उठाएंगे

मध्यप्रदेश में आवारा कुत्तों के हमलों और इनसे हो रही मौतों पर विधानसभा में चिंता जताई गई, जिसके बाद सरकार ने आश्वासन दिया कि वह इस 'गंभीर मुद्दे' पर हर आवश्यक कदम उठाएगी।
मप्र विधानसभा में गूंजा डॉग बाइट केस का मुद्दा, सरकार बोली-जरूरी कदम उठाएंगे
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    भोपाल। मप्र विधानसभा में कांग्रेस के आतिफ अकील और राजन मंडलोई ने डॉग बाइट केस को ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए उठाया और आरोप लगाया कि राजधानी भोपाल सहित पूरे प्रदेश में आवारा कुत्तों का आतंक दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है जबकि शासन-प्रशासन द्वारा करोड़ों रुपए खर्च किए जाने के बाद भी ना तो उनकी जनसंख्या पर लगाम लग रही है और ना ही आवारा कुत्तों के काटने की घटनाओं पर अंकुश लगा है। अकील ने दावा किया कि सिर्फ राजधानी भोपाल में प्रतिदिन आवारा कुत्तों के काटने की 40-50 घटनाएं हो रही हैं और पर्याप्त इलाज की कमी तथा एंटी रैबीज इंजेक्शन की अनुपलब्धता के कारण विगत दिनों कई व्यक्तियों की मौत भी हो चुकी है।

    यह प्रशासनिक विफलता का मुद्दा है

    अकील ने कहा, भोपाल शहर में आए दिन आवारा कुत्तों का आतंक अब केवल डर या असुविधा तक सीमित नहीं रह गया बल्कि गंभीर जन स्वास्थ्य और प्रशासनिक विफलता का मुद्दा बन चुका है। हालात तो ऐसे हैं कि वर्ष 2025 में कुत्तों द्वारा काटे जाने के भोपाल में 19,000 से अधिक मामले दर्ज किए गए। कांग्रेस विधायक ने कहा कि भोपाल शहर में ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में आवारा कुतों की बढ़ती संख्या पर अब तक प्रभावी नियंत्रण नहीं हो सका है।

    हम श्वानों, नहीं आदमियों की चर्चा करें : भार्गव

    भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव ने चर्चा में हिस्सा लेते हुए इस विषय के औचित्य पर ही सवाल उठा दिया। उन्होंने कहा, क्या आवश्यकता है श्वानों की। जब तक की हिंदुस्तान के हर आदमी को भरपेट खाना नहीं मिल जाता तब तक हम क्यों उनकी चर्चा करें और इसकी क्या आवश्यकता है? श्वान पालने की भी क्या आवश्यकता है, चाहे वह पालतू हो या आवारा हो।

    सरकार इस विषय पर गंभीर है : विजयवर्गीय

    नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने करीब 50 मिनट तक चली चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि जब ध्यानाकर्षण प्रस्ताव आया था तब सब लोग इसे हल्के में ले रहे थे लेकिन यह विषय काफी गंभीर है और इसमें गंभीरता से चर्चा भी हुई है। उन्होंने कहा, सरकार इसे गंभीरता से लेगी। इस बारे में उच्चतम न्यायालय के जो निर्देश हैं, उसके अनुसार जो कार्रवाई अपेक्षित है, वह समय रहते की जाएगी ताकि इस समस्या से निजात मिल सके। विजयवर्गीय ने कहा कि उन्होंने सभी के सुझाव दर्ज कर लिए हैं और सरकार आवश्यक सुझाव पर कदम उठाएगी।

    एंटी रेबीज टीकों की कोई कमी नहीं : शुक्ल

    उन्होंने यह भी कहा कि श्वानों की बढ़ती संख्या के अनुपात में सरकार उनका नसबंदी नहीं कर पाती है। उन्होंने इस कार्य के लिए चिकित्सकों की कमी का हवाला देते हुए कहा कि सरकार दूसरे राज्यों से चिकित्सकों को बुलाकर भी बंध्याकरण केंद्र बनाएगी। विजयवर्गीय ने 'पहली रोटी गाय को और अंतिम रोटी श्वान को' दिए जाने की एक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज को भी इसका ध्यान रखना चाहिए ताकि वे भूखे ना रहें। स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि अस्पतालों में एंटी रेबीज टीकों की कोई कमी नहीं है और ना ही उनकी गुणवत्ता पर कोई सवाल है।

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...

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