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LPG की कमी का असर :IIT बॉम्बे ने बदला हॉस्टल मेस का मेनू, तला खाना बंद, आइसक्रीम-मिल्कशेक शुरू

LPG की कमी के चलते IIT बॉम्बे ने हॉस्टल मेस का मेनू बदला है । तले हुए व्यंजन और नॉनवेज बंद, मिठाई की जगह आइसक्रीम और मिल्कशेक दिए जा रहे हैं।
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IIT बॉम्बे ने बदला हॉस्टल मेस का मेनू, तला खाना बंद, आइसक्रीम-मिल्कशेक शुरू
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    मुंबई। देश में एलपीजी गैस की कमी का असर अब बड़े शैक्षणिक संस्थानों पर भी दिखाई देने लगा है। गैस की सीमित आपूर्ति को देखते हुए Indian Institute of Technology Bombay (IIT बॉम्बे) ने अपने हॉस्टल मेस के मेनू में अस्थायी बदलाव करने का फैसला लिया है। संस्थान ने गैस की खपत कम करने के लिए उन खाने की चीजों को मेनू से हटा दिया है जिन्हें बनाने में ज्यादा एलपीजी का इस्तेमाल होता है। इसके तहत तले हुए कई व्यंजन फिलहाल बंद कर दिए गए हैं और कुछ नए विकल्प जोड़े गए हैं।

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    गैस बचाने के लिए मेनू में बदलाव

    IIT बॉम्बे के हॉस्टल में रहने वाले छात्रों को अब नया मेनू दिया जा रहा है। यह बदलाव शनिवार से लागू किया गया है। मेस प्रशासन के अनुसार, इस कदम का मुख्य उद्देश्य एलपीजी गैस की खपत कम करना है ताकि उपलब्ध गैस लंबे समय तक चल सके और छात्रों को नियमित रूप से भोजन मिलता रहे। गैस की कमी के कारण कई ऐसे व्यंजन हटा दिए गए हैं जिन्हें पकाने में अधिक गैस की जरूरत होती है। इससे मेस में खाना बनाने की प्रक्रिया को थोड़ा आसान और कम ईंधन में संभव बनाया जा रहा है।

    तला हुआ खाना फिलहाल बंद

    नए नियमों के तहत फिलहाल मेस में तला हुआ और ज्यादा गैस में पकने वाला खाना नहीं बनाया जाएगा। ऐसे कई व्यंजन जो पहले मेनू में नियमित रूप से शामिल होते थे, उन्हें अस्थायी रूप से हटा दिया गया है। इसका मकसद यह है कि गैस की खपत कम की जा सके और उपलब्ध एलपीजी लंबे समय तक चल सके।

    केवल शाकाहारी भोजन

    मेस के नए नियमों के अनुसार फिलहाल हॉस्टल में रहने वाले छात्रों को केवल शाकाहारी खाना ही परोसा जाएगा। मांसाहारी भोजन को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। मेस प्रशासन का कहना है कि इससे खाना बनाने में लगने वाली गैस की मात्रा कम होगी।

    मिठाई की जगह आइसक्रीम और मिल्कशेक

    मेनू में एक और बड़ा बदलाव किया गया है। पहले जहां रात के खाने के साथ पारंपरिक मिठाइयां दी जाती थीं, अब उनकी जगह आइसक्रीम और मिल्कशेक जैसे विकल्प दिए जा रहे हैं। इन चीजों को तैयार करने में गैस की जरूरत नहीं होती या बहुत कम होती है, इसलिए इन्हें मेनू में शामिल किया गया है। इसके अलावा दूध भी ठंडा या सामान्य तापमान पर दिया जाएगा ताकि उसे गर्म करने में गैस खर्च न करनी पड़े।

    खाने में फल भी शामिल

    मेस मेनू में अब दोपहर और रात के खाने में फल भी शामिल किए गए हैं। फल सीधे परोसे जा सकते हैं और इन्हें पकाने की जरूरत नहीं होती, इसलिए यह भी गैस बचाने का एक तरीका माना जा रहा है।

    छात्रों को ईमेल के जरिए दी जानकारी

    मेनू में किए गए बदलाव की जानकारी छात्रों को ईमेल के जरिए दी गई है। ईमेल में बताया गया है कि मौजूदा गैस आपूर्ति की दिक्कतों को देखते हुए मेस में गैस की खपत कम करना जरूरी हो गया है। इसलिए कुछ व्यंजन अस्थायी रूप से मेनू से हटाए गए हैं या उनमें बदलाव किया गया है।

    सिर्फ एलपीजी पर निर्भर नहीं है संस्थान

    संस्थान के प्रवक्ता ने बताया कि IIT बॉम्बे केवल एलपीजी गैस पर निर्भर नहीं है। कैंपस में पहले से ही बायोगैस और इलेक्ट्रिक कुकिंग जैसे विकल्प भी इस्तेमाल किए जाते हैं। हालांकि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए संस्थान गैस की बचत को प्राथमिकता दे रहा है। अधिकारियों का कहना है कि सामान्य गैस आपूर्ति पूरी तरह बहाल होने तक ईंधन का सावधानी से उपयोग करना जरूरी है।

    कैंपस में कई कार्यक्रम भी रोके गए

    गैस बचाने के लिए संस्थान ने खाने से जुड़े कुछ कार्यक्रमों पर भी अस्थायी रोक लगा दी है। इनमें चाय पार्टियां, विशेष लंच और डिनर, गाला डिनर जैसे कार्यक्रम शामिल हैं। इन आयोजनों में बड़ी मात्रा में खाना बनाया जाता है, जिससे ज्यादा गैस खर्च होती है।

    Sona Rajput
    By Sona Rajput

    माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...Read More

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