गैस संकट का असर :ग्वालियर में फीके पड़े रामनवमी के भंडारे, लकड़ी के चूल्हों पर लौटी परंपरा

ग्वालियर। धार्मिक उत्साह और भक्ति से सराबोर रहने वाली रामनवमी इस बार ग्वालियर में कुछ बदली-बदली नजर आई। हर साल शहर के विभिन्न क्षेत्रों में बड़े स्तर पर आयोजित होने वाले भंडारों की संख्या में इस बार कमी देखने को मिली। इसकी मुख्य वजह रही गैस सिलेंडर की किल्लत, जिसने आयोजनकर्ताओं के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी।
जहां पहले कॉलोनियों और मंदिरों में दर्जनों भंडारे आयोजित होते थे, वहीं इस बार कई स्थानों पर आयोजन सीमित रह गए। जो भंडारे हुए भी, उनमें आधुनिक गैस चूल्हों की जगह पारंपरिक लकड़ी के चूल्हों का सहारा लेना पड़ा। इससे न सिर्फ व्यवस्था में बदलाव आया, बल्कि आयोजन का स्वरूप भी प्रभावित हुआ।
हलवाइयों को ज्यादा नहीं मिले ऑर्डर
शहर के प्रसिद्ध हलवाई रामप्रकाश झा ने बताया कि वे हर साल रामनवमी पर 3 से 4 भंडारों के ऑर्डर लेते थे, लेकिन इस बार गैस की कमी के कारण केवल एक ही भंडारा मिला। खास बात यह रही कि उसे भी लकड़ी के चूल्हे पर तैयार करना पड़ा। उनका कहना है कि गैस की उपलब्धता न होने से बड़े स्तर पर खाना बनाना मुश्किल हो गया, जिससे आयोजकों ने भंडारे कम करने या टालने का निर्णय लिया।
कम नहीं हुआ श्रद्धालुओं का उत्साह
हालांकि, इस चुनौती के बीच भी श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ। जहां भंडारे हुए, वहां लोगों ने प्रसाद ग्रहण कर भगवान श्रीराम के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। कई स्थानों पर पुराने समय की तरह लकड़ी के चूल्हों पर बना भोजन लोगों को अलग ही स्वाद और अनुभव दे गया। कुल मिलाकर, इस बार की रामनवमी ने ग्वालियर में परंपरा और आधुनिकता के बीच एक अनोखा संगम दिखाया, जहां संकट के बीच भी आस्था की ज्योति जलती रही।












